“जो देश अपने नागरिकों पर बम गिराता है, 4 लाख महिलाओं से दुष्कर्म कराता है, वह दूसरों को मानवाधिकार का पाठ न पढ़ाए”
न्यूयॉर्क/नई दिल्ली : भारत ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में पाकिस्तान की ओर से कश्मीर को लेकर किए जा रहे झूठे प्रचार का कड़ा विरोध किया। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने पाकिस्तान पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि एक ऐसा देश जो अपने ही नागरिकों पर बम बरसाता है और 4 लाख महिलाओं के साथ बलात्कार जैसे जघन्य अपराध कर चुका है, उसे दूसरों को मानवाधिकारों का पाठ पढ़ाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
पाकिस्तान के आरोपों पर भारत की तीखी प्रतिक्रिया
UNSC की खुली बहस के दौरान एक पाकिस्तानी प्रतिनिधि ने कश्मीर में कथित मानवाधिकार हनन और यौन हिंसा की बातें कहीं। इसके जवाब में हरीश ने कहा,
“पाकिस्तान बार-बार झूठा प्रचार कर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह करने की कोशिश करता है। लेकिन अब दुनिया उनके इस दोहरे चेहरे को भली-भांति पहचान चुकी है।”
उन्होंने पाकिस्तान के 1971 के ऑपरेशन सर्चलाइट का ज़िक्र करते हुए कहा कि यह वही देश है, जिसने अपनी ही ज़मीन पर नरसंहार, बलात्कार और दमन का सबसे भयावह इतिहास रचा था।
ऑपरेशन सर्चलाइट: जब मानवता शर्मसार हुई
- मार्च 1971 में पाकिस्तान की सेना ने पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में ऑपरेशन सर्चलाइट चलाया था।
- इस सैन्य कार्रवाई में करीब 30 लाख लोगों की हत्या, 4 लाख से अधिक महिलाओं के साथ बलात्कार और लाखों की संख्या में विस्थापन हुआ।
- पाकिस्तान की सेना ने ढाका विश्वविद्यालय, मीडिया दफ्तरों और आम जनता के इलाकों पर अंधाधुंध हमले किए।
- इस कार्रवाई के बाद भारत में करीब 1 करोड़ शरणार्थी पहुंचे।
- अंततः भारत के हस्तक्षेप और 13 दिनों के युद्ध के बाद 16 दिसंबर 1971 को बांग्लादेश का जन्म हुआ।
हरीश ने कहा,
“पाकिस्तान की सेना को 1971 में अपने ही नागरिकों पर नरसंहार करने की मंजूरी दी गई थी। आज उसी देश के नेता भारत पर उंगली उठा रहे हैं।”
हालिया हमला: पाकिस्तान ने खुद के नागरिकों पर गिराए बम
भारत ने हाल में पाकिस्तान द्वारा 22 सितंबर को खैबर पख्तूनख्वा की तिराह घाटी में किए गए हवाई हमलों की ओर भी ध्यान दिलाया।
इन हमलों में 30 से अधिक नागरिकों की मौत हो गई थी। पाकिस्तानी वायुसेना का दावा था कि ये हमले तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के आतंकियों पर किए गए थे, लेकिन असल में निशाना बने निर्दोष आम नागरिक।
भारत की कड़ी चेतावनी: “कश्मीर भारत का अभिन्न अंग था, है और रहेगा”
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में एक बार फिर स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और रहेगा।
हरीश ने कहा कि पाकिस्तान का उद्देश्य सिर्फ अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भटकाना और खुद पर लगे मानवाधिकार उल्लंघनों से ध्यान हटाना है।
भारतीय प्रतिनिधि ने UNHRC में भी की थी कड़ी आलोचना
पिछले हफ्ते जिनेवा में मानवाधिकार परिषद की बैठक के दौरान भारत के प्रतिनिधि के.एस. मोहम्मद हुसैन ने भी पाकिस्तान को जमकर लताड़ा था।
उन्होंने कहा:
“जो देश अपने अल्पसंख्यकों—हिंदू, सिख, ईसाई और शियाओं—पर लगातार अत्याचार करता है, उसे मानवाधिकार पर भाषण देने का कोई हक नहीं। पाकिस्तान अब दुनिया के सबसे खराब मानवाधिकार रिकॉर्ड वाले देशों में गिना जाता है।”
पाकिस्तान की ओर से फिर आई युद्ध की धमकी
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने हाल ही में एक भड़काऊ बयान देते हुए कहा:
“अगर अब युद्ध हुआ तो भारत अपने ही मलबे के नीचे दब जाएगा।”
इसके अलावा पाकिस्तान सेना के प्रवक्ता ने भी भारत के सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी के बयान को “युद्ध को बढ़ावा देने वाला” करार दिया।
जनरल द्विवेदी ने कहा था:
“पाकिस्तान को तय करना होगा कि वह दुनिया के नक्शे पर रहना चाहता है या नहीं। आतंकवाद को संरक्षण देना बंद करना उसकी ज़िम्मेदारी है।”
पाकिस्तान का दोहरा चेहरा बेनकाब
भारत ने साफ कर दिया है कि पाकिस्तान के झूठ और युद्धोन्मादी बयानों से भारत डरने वाला नहीं है।
संयुक्त राष्ट्र जैसे मंचों पर अब भारत केवल प्रतिक्रिया नहीं देता, बल्कि ऐतिहासिक तथ्यों और वर्तमान परिस्थितियों के आधार पर सशक्त जवाब देकर पाकिस्तान की छवि को बेनकाब कर रहा है।



