भोपाल: मध्यप्रदेश में गुरुवार को कोरोना से इस साल की छठी मौत हुई है। 50 साल की महिला कई गंभीर बीमारियों से जूझ रही थी। उसे सेप्टिक शॉक, किडनी की परेशानी, हाई ब्लड प्रेशर, कोरोना संक्रमण, फेफड़ों में सूजन (ARDS), फेफड़ों में हवा भरना (न्यूमोथोरैक्स), एसिड बढ़ना (एसिडोसिस) और दिमाग की समस्या (एन्सेफेलोपैथी) थी।
इन सभी कारणों से उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई और आखिरकार उसकी मौत हो गई। इस साल कोरोना से जितनी भी मौतें हुई हैं, वे सभी महिलाएं थीं।
पहले हुई 5 मौत
मंडला: नारायणगंज निवासी महिला की जबलपुर के मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान कोरोना से मौत हुई। महिला गर्भवती थी और उसे डिलीवरी के लिए भर्ती कराया गया था।
भिंड: 52 वर्षीय महिला के फेफड़ों में गंभीर सूजन और सांस लेने में काफी परेशानी हो रही थी। ग्वालियर के एक अस्पताल में महिला की इलाज के दौरान 23 जून को मौत हो गई।
रतलाम: 52 वर्षीय महिला, जिन्हें टीबी, ब्रोंकाइटिस और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियां थीं। मौत 11 जून को इंदौर में इलाज के दौरान हुई।
खरगोन: 44 वर्षीय महिला, जिन्होंने हाल ही में एमटीएच अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया था। 6 जून को एमआरटीबी अस्पताल में मृत्यु हुई।
इंदौर: 74 वर्षीय महिला, जिन्हें किडनी की बीमारी थी। 27 अप्रैल को अरबिंदो अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हुई थी।
MP में कुल 82 एक्टिव केस
कुल केस – 290
एक्टिव केस – 59
ठीक हुए- 225
मौतें- 6
राज्य में अब XFG वेरिएंट सक्रिय
एम्स भोपाल की जीनोमिक रिपोर्ट के अनुसार, मध्यप्रदेश में इस समय कोरोना का XFG वेरिएंट सक्रिय है। जून के तीसरे सप्ताह में मिले पॉजिटिव मरीजों में यही वेरिएंट पाया गया है। मई माह में LF.7 वेरिएंट सक्रिय था। एम्स ने सोमवार शाम 6 बजे अपनी आधिकारिक रिपोर्ट जारी की, जिसमें प्रदेशभर से आए संक्रमित मरीजों के सैंपल शामिल थे। इनकी टेस्टिंग लगभग 15 दिन तक चली।
44 सैंपलों की गई जीनोम सीक्वेंसिंग
एम्स ने कुल 44 सैंपलों की जीनोम अनुक्रमण (सीक्वेंसिंग) की। इनमें शामिल थे
- भोपाल से: 14 सैंपल
- ग्वालियर से: 22 सैंपल
- टीकमगढ़ से: 2 सैंपल
- इंदौर, खरगोन, छिंदवाड़ा, ललितपुर, सीधी, गया से: 1-1 सैंपल
स्टडी के मुख्य पॉइंट
- XFG वेरिएंट 44 में से 28 सैंपलों (63.6%) में पहचाना गया।
- XFG वेरिएंट पूर्व में फैल रहे LF.7 वेरिएंट से उत्पन्न हुआ है।
- XFG वेरिएंट से विकसित एक उप-वेरिएंट XFG.3 की भी पहचान की गई। जो XFG पॉजिटिव 28 सैंपलों में से 5 में पाया गया।
- NB.1 (निंबस वेरिएंट) किसी भी सैंपल में नहीं पाया गया।
अब सिर्फ XFG वेरिएंट एक्टिव
रिपोर्ट के अनुसार, XFG वेरिएंट की शुरुआत मई के अंतिम सप्ताह में हुई थी। जून के पहले और दूसरे सप्ताह में यह तेजी से फैला और अब जून के तीसरे सप्ताह तक प्रदेश में एकमात्र सक्रिय वेरिएंट बन गया है। वहीं, LF.7 जो पहले मई में प्रमुख था, जो मई के अंतिम सप्ताह में 50% सैंपलों में मौजूद था, जून के दौरान धीरे-धीरे कमजोर होता गया और जून के तीसरे सप्ताह तक पूरी तरह समाप्त हो गया।
वैक्सीनेटेड लोग भी हो रहे संक्रमित
रिपोर्ट में बताया गया है कि XFG और LF.7 वेरिएंट में कुछ ऐसे म्यूटेशन हैं, जो टीका लगवा चुके लोगों को भी संक्रमित कर सकते हैं। हालांकि, इनके लक्षण हल्के होते हैं और कई मरीजों में कोई लक्षण नहीं दिखाई दिए। यही कारण है कि WHO ने इन्हें चिंता के वेरिएंट (Variant of Concern) नहीं माना है, बल्कि निगरानी के वेरिएंट (Variant Under Monitoring) के रूप में सूचीबद्ध किया है।
हर वैरिएंट पर एम्स की नजर
एम्स भोपाल के निदेशक डॉ. अजय सिंह ने कहा, हमारी वायरोलॉजी लैब हर नए वेरिएंट की समय पर पहचान के लिए लगातार काम कर रही है। यह केवल एक शोध प्रक्रिया नहीं, बल्कि महामारी से निपटने की रणनीति का अहम हिस्सा है। हम प्रदेश की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को तैयार रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
एम्स का मानना है कि राज्य और आसपास के क्षेत्रों में SARS-CoV-2 की जीनोमिक सीक्वेंसिंग को एक नियमित और प्राथमिक सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्य के रूप में अपनाना चाहिए। इससे भविष्य के संक्रमणों की समय रहते चेतावनी, तेजी से प्रतिक्रिया और बेहतर तैयारी संभव हो सकेगी।



