✍️ जितेन्द्र चौधरी
प्रधान संपादक — विशाल इंडिया हिंदी दैनिक
सवालजिंदा हैं
ग्रेटर नोएडा की जमीनी हकीकत से उठता एक और सवाल — ESCON Infra Realtor की ‘पैनाश विला’ सीरीज़ आखिर किसकी शह पर पनप रही है?
जब पूरा सिस्टम खामोश हो और पत्रकारों की चेतावनी भी अनसुनी कर दी जाए, तब शक पुख्ता होता है कि रजिस्ट्री नहीं, रिश्तों की दम पर इमारत खड़ी हो रही है।
📌 नक्शा पास नहीं,
📌 किसी भी अथॉरिटी से अनुमति नहीं,
📌 और फिर भी बिक्री जोरों पर!
क्या इसे रियल एस्टेट विकास कहें या संगठित लूट?
❗बड़ी बात यह है:
ग्रेटर नोएडा साइट C (Surajpur) में ESCON Infra Realtor की Panache Villas स्कीम पूरी तरह से अवैध है — यह सूचना खुद प्राधिकरण की RTI और इन्वेस्टिगेटिव दस्तावेज़ों में प्रमाणित हो चुकी है। इसके बावजूद खुलेआम बुकिंग चल रही है — Facebook और Instagram पर धड़ल्ले से एड चल रहे हैं, और साइट विज़िट के नाम पर लोगों को ठगा जा रहा है।
🧨 सवाल यह भी कि…
जब शाहबेरी जैसे घोटाले से पूरा देश हिल गया था, तब ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी और शासन-प्रशासन ने यह कसम खाई थी कि दोबारा ऐसा नहीं होगा।
तो अब ESCON को किसके इशारे पर छूट मिली है?
क्या अफसर चुप हैं या हिस्सेदार?
😠 जनता पूछ रही है:
“यदि नक्शा पास नहीं, अनुमति नहीं, तो यह निर्माण कार्य किसके बल पर हो रहा है?”
“अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई?”
“अगर मीडिया ने यह मुद्दा उठाया है, शिकायते पहुंची हैं तो शासन की चुप्पी किस चीज़ का संकेत है?”
“दीवारें उठीं हैं बेइमानी की ईंटों से,
जो बिक गया वो बिल्डर है, जो चुप रहा वो सिस्टम है!”
📣 यह खबर सिर्फ एक प्रोजेक्ट की नहीं — यह पूरे सिस्टम पर सवाल है।
आज ESCON है, कल कोई और होगा — जब तक कार्रवाई नहीं होगी।



