मुंबई : ईपीएफओ ने अपने 2.7 करोड़ से ज्यादा एक्टिव मेंबर्स के लिए 3 बड़े बदलाव किए हैं। पहला है ‘पासबुक लाइट’ का लॉन्च, जो पीएफ कॉन्ट्रीब्यूशन को तेजी से चेक करने में मदद करेगा।
दूसरा, जॉब चेंज करने वालों के लिए ट्रांसफर सर्टिफिकेट को ऑनलाइन डाउनलोड करने की सुविधा। ये बदलाव पीएफ पोर्टल को और यूजर-फ्रेंडली बनाने के लिए हैं।
तीसरा, पीएफ विड्रॉल क्लेम्स को तेजी से सेटल करने के लिए क्लेम सेटलमेंट प्रोसेस में भी बदलाव किया गया है। केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया ने इन बदलाव की जानकारी दी।
पासबुक लाइट क्या है और ये कैसे काम करेगा?
अभी तक पीएफ कंट्रीब्यूशन, विड्रॉल और बैलेंस की डिटेल्स चेक करने के लिए एक अलग पासबुक पोर्टल पर जाना पड़ता था। लेकिन अब पासबुक लाइट के साथ सब कुछ ईपीएफओ के मेंबर पोर्टल पर ही उपलब्ध हो जाएगा। यानी एक ही लॉगिन से सारी जानकारी मिल जाएगी।
इसके तीन फायदे होंगे:
- सिंगल लॉगिन: अब अलग पोर्टल स्विच करने की जरूरत नहीं।
- फास्ट व्यू: कंट्रीब्यूशन, विड्रॉल और बैलेंस का सरल ओवरव्यू।
- कम डिले: पुराने सिस्टम की तुलना में तेज लोडिंग, खासकर पीक टाइम में।
ये बदलाव शिकायतें कम करने और पीएफ डिटेल्स तक आसान एक्सेस के लिए हैं।
पासबुक लाइट कैसे एक्सेस करें? स्टेप-बाय-स्टेप गाइड
डिटेल्ड व्यू के लिए अभी भी पासबुक पोर्टल पर ही जाना होगा।
अपने मौजूदा क्रेडेंशियल्स से ईपीएफओ मेंबर पोर्टल पर लॉगिन करें।
दूसरे नंबर पर मौजूद व्यू टैब में जाकर पासबुक लाइट पर क्लिक करें ।
यहां पर लेटेस्ट 5 महीने के कॉन्ट्रीब्यूशन दिखाई देंगे।
एनेक्सर K के ऑनलाइन एक्सेस से क्या होगा?
ये एक ट्रांसफर सर्टिफिकेट है, जिसे ईपीएफओ जॉब चेंज करने वाले कर्मचारियों के लिए जनरेट करता है। यह दस्तावेज पुराने एम्प्लॉयर से नए एम्प्लॉयर के पास पीएफ अकाउंट ट्रांसफर की जानकारी देता है। पहले ये रिक्वेस्ट पर ही मिलता था।
ये 2 तरह से मदद करेगा
- पीएफ ट्रांसफर एप्लिकेशन का स्टेटस ट्रैक करना आसान।
- पीएफ बैलेंस और सर्विस पीरियड सही अपडेट हुआ या नहीं, ये कन्फर्म कर सकेंगे।
Annexure K के लिए भी ईपीएफओ मेंबर पोर्टल पर लॉगिन करना होगा। ट्रांसफर सेक्शन में जाकर डाउनलोड बटन क्लिक करें। अगर UAN एक्टिवेटेड नहीं है, तो पहले उसे लिंक करवाएं।
अब और तेजी से सेटल होंगे पीएफ के क्लेम्स
अभी ईपीएफओ की कोई भी सर्विस, जैसे पीएफ ट्रांसफर, सेटलमेंट, एडवांस या रिफंड, के लिए हायर लेवल के अधिकारियों (RPFC/ऑफिसर-इन-चार्ज) से अप्रूवल लेना पड़ता है। इससे मेंबर्स के क्लेम्स में देरी होती है और प्रोसेसिंग टाइम बढ़ जाता है।
इस सिस्टम को आसान और तेज करने के लिए, ईपीएफओ ने ये अधिकार असिस्टेंट पीएफ कमिश्नर्स और निचले स्तर के अधिकारियों को ट्रांसफर कर दिया है।



