पटना। बिहार की राजनीति एक बार फिर करवट लेने को तैयार है। आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सभी दलों ने अपनी कमर कस ली है। ऐसे में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने बड़ा कदम उठाते हुए अपने सभी 101 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है।
यह सूची न सिर्फ जदयू की चुनावी रणनीति, बल्कि उसके राजनीतिक और सामाजिक संतुलन साधने की कोशिशों को भी उजागर करती है।
जेडीयू की टिकट रणनीति: जाति + चेहरा + गठबंधन
पार्टी ने दो दिन में दो लिस्ट जारी कर 101 सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की:
- पहली लिस्ट: 57 नाम – जारी बुधवार को
- दूसरी लिस्ट: 44 नाम – जारी गुरुवार को
टिकट बंटवारे में नीतीश कुमार की सिग्नेचर स्टाइल साफ दिखी:
जातीय संतुलन
अनुभवी चेहरों को मौका
महिला सशक्तिकरण का संदेश
सियासी दबाव वाले चेहरों को साधना
गठबंधन में संतुलन और टकराव – दोनों
101 कैंडिडेट्स में सामाजिक समीकरण का गणित
जेडीयू की सूची समाज के सभी वर्गों को छूने की कोशिश है। उम्मीदवारों की सामाजिक पृष्ठभूमि कुछ इस प्रकार है:
| वर्ग | उम्मीदवार |
|---|---|
| पिछड़ा वर्ग (OBC) | 37 |
| अति पिछड़ा वर्ग (EBC) | 22 |
| सामान्य वर्ग | 22 |
| मुस्लिम | 4 |
| अनुसूचित जनजाति | 1 |
| महिलाएं (कुल) | 13 |
ध्यान दें:
- पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग यानी कुल 59 सीटें OBC+EBC को दी गईं।
- मुस्लिमों को 4 सीटें मिलीं, जो कुल सीटों का करीब 4% है।
- महिलाओं को 13 सीटें देकर पार्टी ने ‘सशक्तिकरण’ का संदेश देने की कोशिश की है।
महिलाओं को मजबूत मंच
जेडीयू ने इस बार 13 महिला उम्मीदवारों को टिकट देकर एक सशक्त संदेश दिया है। इनमें कई सीटें ऐसी हैं, जहां पुरुषों का दबदबा रहा है।
मनोरमा देवी (बेलागंज) – एक बार फिर मैदान में, पिछली बार उपचुनाव जीता
विभा देवी (नवादा) – विवादित नेता राजबल्लभ यादव की पत्नी, जिन्हें तेजस्वी यादव की पत्नी पर विवादित टिप्पणी के लिए जाना गया
बाकी 11 महिलाएं अलग-अलग सामाजिक पृष्ठभूमि से हैं – कुछ ग्रामीण, कुछ राजनीतिक परिवारों से
तीन बाहुबली फिर मैदान में
बिहार की राजनीति में बाहुबलियों का असर आज भी कायम है। जेडीयू ने इस बार भी इसे नजरअंदाज नहीं किया।
| नाम | सीट | पहचान |
|---|---|---|
| अनंत सिंह | मोकामा | फायरब्रांड बाहुबली नेता, कई आपराधिक केस |
| धूमल सिंह | एकमा | दबंग छवि |
| अमरेंद्र पांडेय | कुचायकोट | स्थानीय प्रभावशाली चेहरा |
साथ ही चर्चित आनंद मोहन के बेटे चेतन आनंद को नवीनगर से टिकट दिया गया है। चेतन 2020 में शिवहर से विधायक थे।
सिटिंग विधायकों पर फिर से भरोसा
JDU ने अपनी विधानसभा में मौजूदा ताकत को बरकरार रखने के लिए पुराने चेहरों पर दांव लगाया है। कुल 37 सिटिंग विधायक दोबारा मैदान में हैं।
पहली लिस्ट – 18 विधायक रिपीट
दूसरी लिस्ट – 19 विधायक रिपीट
खास चेहरे:
- विजय चौधरी (सरायरंजन): बेटे के नाम की चर्चा थी, लेकिन खुद को ही दोबारा उतारा
- महेश्वर हजारी (कल्याणपुर): टिकट कटने की अटकलों को झुठलाते हुए फिर से मैदान में
- मदन सहनी (बहादुरपुर), श्रवण कुमार (नालंदा), सुनील कुमार (भोरे) जैसे मंत्री भी बरकरार
चिराग पासवान से टकराव: 5 सीटों पर JDU की चुनौती
नीतीश कुमार ने गठबंधन के भीतर एक संकेत साफ दिया है कि वे किसी ‘छोटे भाई’ की दादागीरी नहीं मानते।
चिराग पासवान की LJP (R) को एनडीए में 29 सीटें मिली हैं, लेकिन जेडीयू ने इनमें से 5 सीटों पर अपने कैंडिडेट उतार दिए हैं:
सोनबरसा
अलौली
राजगीर
एकमा
मोरवा
राजनीतिक संदेश साफ है – सीटों के बंटवारे से आगे जाकर नीतीश अपने दम पर लड़ाई लड़ना चाहते हैं।
गठबंधन के भीतर सीट समर्पण: सम्राट चौधरी को नीतीश की गद्दी
नीतीश कुमार ने अपनी सिटिंग सीट तारापुर छोड़ दी है ताकि डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी वहां से चुनाव लड़ सकें।
इसी तरह परबत्ता सीट भी सहयोगी के लिए छोड़ी गई है।
यह NDA के भीतर 101-101 सीटों का बराबर बंटवारा दर्शाता है, बाकी 41 सीटें LJP(R), HAM और अन्य दलों के हिस्से गईं।
मुख्यमंत्री चेहरा: फिर से नीतीश ही
कुछ हफ्तों तक NDA में भ्रम की स्थिति बनी रही कि क्या भाजपा नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में बरकरार रखेगी?
अब तस्वीर साफ है:
BJP, LJP(R), HAM – सभी ने नीतीश कुमार के नेतृत्व पर सहमति जताई है
जेडीयू का ऑफिशियल नारा –
“2025 से 2030, फिर से नीतीश”
चुनाव कार्यक्रम (बिहार विधानसभा चुनाव 2025)
| चरण | तारीख | सीटें |
|---|---|---|
| पहला चरण | 6 नवंबर | 121 सीटें |
| दूसरा चरण | 11 नवंबर | 122 सीटें |
| मतगणना | 14 नवंबर | सभी 243 सीटें |
राजनीतिक विश्लेषण: क्या संदेश देती है जेडीयू की सूची?
- नीतीश कुमार ने एक बार फिर जातीय संतुलन और सामाजिक समीकरण को साधा है
- महिलाओं और पिछड़े वर्ग को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देकर समाजिक न्याय के एजेंडे को आगे बढ़ाया
- बाहुबलियों को टिकट देकर राजनीतिक ‘रीयलिटी’ स्वीकार की
- चिराग पासवान को सीधी चुनौती देकर बताया कि नीतीश अभी भी ‘बॉस’ हैं
- बीजेपी से गठबंधन में सजग लेकिन सतर्क सहयोगी के रूप में पेश आए
नतीजा क्या निकलेगा?
बिहार की राजनीति में हर आंकड़ा, हर नाम और हर टिकट के पीछे एक कहानी होती है। जेडीयू की इस सूची ने सिर्फ उम्मीदवारों के नाम नहीं बताए – इसने नीतीश कुमार की सोच, रणनीति और सत्ता में वापसी की महत्वाकांक्षा को भी सामने रखा है।
अब देखना होगा कि जनता इन समीकरणों को कैसे पढ़ती है — 2025 से 2030 तक ‘फिर से नीतीश’ होगा या कोई नया अध्याय लिखा जाएगा?



