वाशिंगटन / इस्लामाबाद | पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर वैश्विक मंच पर चर्चा में हैं। इस बार वजह है—गाज़ा युद्धविराम समझौता, जिसकी मध्यस्थता उन्होंने की, और जिसके चलते इज़राइल और हमास के बीच दो वर्षों से चला आ रहा संघर्ष थम गया। इस पहल को लेकर पाकिस्तान ने ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया है, जबकि भारत ने भी इस समझौते का खुले शब्दों में स्वागत किया है।
ट्रंप का दावा: “आठ बड़े युद्ध रोके, अब नोबेल जरूरी नहीं”
ट्रंप ने कहा कि उन्होंने गाज़ा से पहले सात अन्य संघर्षों को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाया था—जिनमें उनका एक दावा भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध को रोकना भी शामिल है। हालाँकि भारत इस दावे को खारिज करता आया है और आधिकारिक रूप से कहता है कि 2023 का युद्धविराम दोनों देशों के डीजीएमओ (DGMO) के बीच सीधे संवाद से हुआ था, न कि किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से।
ट्रंप ने गाज़ा संघर्ष को “मध्य पूर्व के लिए नया और सुंदर दिन” बताते हुए कहा, “मैंने यह शांति नोबेल के लिए नहीं, इंसानियत के लिए लाई है।”
भारत ने की ट्रंप की खुले दिल से प्रशंसा
गाज़ा शांति शिखर सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने किया। वे प्रधानमंत्री मोदी के विशेष दूत के रूप में सम्मेलन में उपस्थित रहे। भारत के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा, “भारत इस ऐतिहासिक शांति समझौते का स्वागत करता है और उम्मीद करता है कि यह क्षेत्र में स्थायी शांति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा,
“हम दो साल से अधिक समय तक बंदी रहने के बाद सभी बंधकों की रिहाई का स्वागत करते हैं। यह उनके परिवारों के साहस, राष्ट्रपति ट्रंप के अटूट शांति प्रयासों और प्रधानमंत्री नेतन्याहू के दृढ़ संकल्प को श्रद्धांजलि है।”
पाकिस्तान ने किया नोबेल नामांकन का समर्थन
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ ने कहा कि ट्रंप को शांति प्रयासों के लिए फिर से नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया गया है।
“ट्रंप ने न केवल भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध को रोका, बल्कि गाज़ा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में भी लाखों ज़िंदगियाँ बचाईं। यह योगदान असाधारण है,” शरीफ ने एक प्रेस वार्ता में कहा।
गाज़ा समझौते में क्या है खास?
गाज़ा युद्धविराम समझौता तीन चरणों में लागू होगा। पहले चरण में हमास द्वारा बंधकों की रिहाई, इज़राइल द्वारा फिलिस्तीनी कैदियों की वापसी, और गाज़ा में सीज़फायर की निगरानी शामिल है।
इस दस्तावेज़ पर ट्रंप के साथ कई अरब और मुस्लिम देशों के नेताओं ने हस्ताक्षर किए। इसे ट्रंप ने अपनी कूटनीतिक जीत बताया।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
राजनयिक विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही ट्रंप की भूमिका “विवादास्पद” रही हो, लेकिन गाज़ा में युद्धविराम एक मील का पत्थर है। भारत और पाकिस्तान का ट्रंप की पहल पर सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया देना इस बात का संकेत है कि इस बार यह प्रयास पहले की तुलना में कहीं अधिक राजनयिक गंभीरता से लिया जा रहा है।
डोनाल्ड ट्रंप की यह पहल उन्हें एक बार फिर विश्व राजनीति के केंद्र में ला खड़ा करती है। जहां एक ओर पाकिस्तान उन्हें नोबेल दिलाना चाहता है, वहीं भारत भी उनके प्रयासों की तारीफ़ करने से नहीं हिचका। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ट्रंप को वास्तव में नोबेल शांति पुरस्कार के लिए चुना जाता है, या यह सिर्फ़ कूटनीतिक चर्चाओं का एक और अध्याय बनकर रह जाएगा।



