Friday, March 6, 2026
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एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया का IPO आज से ओपन

15% हिस्सेदारी बेचेगी कंपनी, रिटेल निवेशक न्यूनतम ₹14,820 में लगा सकेंगे बोली

नई दिल्ली। दक्षिण कोरिया की इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स बनाने वाली दिग्गज कंपनी एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया लिमिटेड का इनिशियल पब्लिक ऑफर (IPO) आज, 7 अक्टूबर से सब्सक्रिप्शन के लिए खुल गया है। यह इश्यू 9 अक्टूबर तक खुला रहेगा। निवेशक इस दौरान अपने आवेदन दाखिल कर सकते हैं।

इस ऑफर के तहत कंपनी के मौजूदा शेयरधारक 10.18 करोड़ शेयर्स बेच रहे हैं, जिनकी कुल वैल्यू लगभग ₹11,607 करोड़ रुपये है। यह कंपनी की कुल हिस्सेदारी का 15% हिस्सा है। इस इश्यू में कोई भी फ्रेश इक्विटी शेयर जारी नहीं किया जा रहा है।


IPO का विवरण:

विवरणजानकारी
ओपनिंग तारीख7 अक्टूबर 2025
क्लोजिंग तारीख9 अक्टूबर 2025
प्राइस बैंड₹1,080 – ₹1,140 प्रति शेयर
लॉट साइज13 शेयर
न्यूनतम निवेश (1140 पर)₹14,820
अधिकतम निवेश (13 लॉट)₹1,92,660
इश्यू का प्रकारऑफर फॉर सेल (OFS)
इश्यू साइज₹11,607 करोड़

किसके लिए कितना रिजर्व?

IPO में हिस्सा इस प्रकार से आरक्षित किया गया है:

  • 50% – क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIBs)
  • 35% – रिटेल निवेशक
  • 15% – नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NIIs)

कंपनी का कारोबार और स्थिति

एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया लिमिटेड देश की अग्रणी कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों में से एक है। कंपनी B2C और B2B दोनों सेगमेंट में काम करती है।

प्रमुख प्रोडक्ट्स:

  • वॉशिंग मशीन
  • रेफ्रिजरेटर
  • एलईडी टीवी
  • माइक्रोवेव
  • इन्वर्टर
  • एयर कंडीशनर

मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स: नोएडा और पुणे में स्थित हैं।

कंपनी की बैकग्राउंड:

  • स्थापना (द. कोरिया में): 1958 (गोल्डस्टार नाम से)
  • भारत में प्रवेश: 1997
  • कर्मचारी: 2,300+ (फरवरी 2025 तक)
  • Q1 FY25 रेवेन्यू: ₹6,337 करोड़
  • Q1 प्रॉफिट: ₹513 करोड़

दूसरी कोरियाई कंपनी बनी, जो भारतीय बाजार में लाई IPO

एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स भारत में आईपीओ लाने वाली दूसरी दक्षिण कोरियाई कंपनी है। इससे पहले हुंडई मोटर्स इंडिया का आईपीओ अक्टूबर 2024 में आया था, जो सफलतापूर्वक शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुआ।

वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि एलजी इंडिया की ब्रांड वैल्यू, मजबूत बाजार पकड़ और स्थिर मुनाफा इसे एक बेहतर लॉन्ग-टर्म निवेश विकल्प बना सकते हैं। हालांकि यह इश्यू पूरी तरह से OFS है, यानी कंपनी को इससे सीधे फंड नहीं मिलेगा। यह प्रमोटरों की हिस्सेदारी में आंशिक कमी का माध्यम है।

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