अमरावती, आंध्र प्रदेश | आंध्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी (APCC) की अध्यक्ष वाईएस शर्मिला ने राज्य सरकार पर सीधा और तीखा हमला बोलते हुए सवाल उठाया है —
“क्या दलित बस्तियों में मंदिर निर्माण की बजाय बच्चों के लिए शौचालय और स्कूल मांगना गलत है?”
शर्मिला का यह बयान उस वक्त आया जब उन्होंने जुलाई में सामने आए एक चौंकाने वाले तथ्य की ओर ध्यान दिलाया, जिसमें 228 दलित छात्र केवल एक शौचालय का उपयोग करने को मजबूर थे।
“मंदिरों से पहले बच्चों को मूलभूत सुविधाएं दें”
शर्मिला ने कहा,
“सरकार का ध्यान पहले स्कूलों और आधारभूत ढांचे पर होना चाहिए। मंदिर बाद में भी बन सकते हैं, लेकिन बच्चों का भविष्य अभी संवारा जाना चाहिए। क्या यह कहना गुनाह है?”
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और सत्तारूढ़ गठबंधन राजग (NDA) का ध्यान दलितों की वास्तविक समस्याओं की ओर नहीं है, बल्कि वे केवल धार्मिक दिखावे में उलझे हैं।
TTD फंड का दुरुपयोग और दलितों की अनदेखी का आरोप
कांग्रेस नेता ने तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) की संपत्तियों और फंड के कथित दुरुपयोग का मुद्दा उठाया और कहा कि:
“TTD का पैसा भक्तों की आस्था और धार्मिक विश्वास का प्रतीक है। इसका इस्तेमाल सिर्फ धार्मिक प्रचार के लिए नहीं, समाज के कमजोर तबके के विकास के लिए भी होना चाहिए।”
“हिंदू धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि असली धर्म का साथ”
शर्मिला ने स्पष्ट किया कि न तो वे और न ही कांग्रेस पार्टी हिंदू धर्म के खिलाफ है।
“कांग्रेस एक सर्वधर्म समभाव वाली पार्टी है। हम संविधान के मूल्यों और सभी धर्मों की समानता में विश्वास करते हैं।”
BJP और RSS पर ‘दुष्प्रचार’ का आरोप
शर्मिला ने कहा कि भाजपा और आरएसएस उनके बयानों को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहे हैं ताकि हिंदू समुदाय और संतों को उनके खिलाफ भड़काया जा सके।
उन्होंने ‘सोची-समझी साजिश’ के तहत कांग्रेस और दलित हितैषी बयानों को गलत रंग देने का आरोप लगाया।
CBI जांच की मांग और चंद्रबाबू पर हमला
शर्मिला ने याद दिलाया कि तिरुमाला लड्डू घोटाले की CBI जांच की पहली मांग उन्होंने ही की थी और यह भक्तों की भावनाओं से जुड़ा गंभीर मामला है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू इस मुद्दे पर जवाब देने में “जिम्मेदारी से चूक गए।”
BJP की तीखी प्रतिक्रिया: शर्मिला पर धार्मिक उकसावे का आरोप
बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पीवीएन माधव ने शर्मिला पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि वह धार्मिक नफरत फैला रही हैं और राज्य में सांप्रदायिक तनाव को बढ़ावा दे रही हैं।
उन्होंने यह तक कह दिया कि:
“शर्मिला और उनके पति धर्मांतरण में लिप्त हैं, फिर भी उन्हें कांग्रेस ने एपीसीसी अध्यक्ष बना दिया।”
माधव ने कांग्रेस पर धार्मिक राजनीति करने और BJP पर झूठे आरोप लगाने का आरोप लगाया, और यह भी चेतावनी दी कि:
“जबरन धर्मांतरण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
वास्तविक सवाल यह है…
क्या एक दलित बस्ती में मंदिर से पहले शौचालय, स्कूल और साफ़ पानी की माँग करना गलत है?
क्या धार्मिक आस्था की आड़ में दलितों की बुनियादी ज़रूरतें अनदेखी की जा सकती हैं?
शर्मिला का बयान सिर्फ एक राजनीतिक टिप्पणी नहीं, बल्कि उन लाखों वंचित लोगों की आवाज़ है जिनकी समस्याएं आज भी अनसुनी हैं।



