कांकेर, छत्तीसगढ़ | छत्तीसगढ़ के कांकेर ज़िले में रविवार सुबह सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में तीन नक्सली मारे गए हैं। यह मुठभेड़ कांकेर, धमतरी और ओडिशा की सीमा से सटे घने जंगलों में हुई, जहां सुरक्षाबलों ने खुफिया सूचना के आधार पर ऑपरेशन चलाया था।
घटनास्थल से मारे गए नक्सलियों के शव बरामद कर लिए गए हैं, और अभी भी इलाके में सघन सर्च ऑपरेशन चल रहा है। कांकेर के एसपी कल्याण एलिसेला ने इस मुठभेड़ की पुष्टि की है।
मुठभेड़ की शुरुआत कैसे हुई?
पुलिस सूत्रों के अनुसार, सुरक्षाबलों को खुफिया जानकारी मिली थी कि बॉर्डर क्षेत्र के सघन जंगलों में नक्सलियों की मौजूदगी है। इसी के आधार पर एक संयुक्त सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया।
जब सुरक्षाबल सुबह जंगलों में गश्त कर रहे थे, तभी नक्सलियों ने घात लगाकर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में जवानों ने भी मोर्चा संभाल लिया और दोनों ओर से गोलीबारी शुरू हो गई।
करीब एक घंटे तक चली इस मुठभेड़ में तीन नक्सलियों को ढेर कर दिया गया। घटनास्थल से हथियार और नक्सली सामग्री भी बरामद हुई है। सुरक्षा बलों को किसी प्रकार की हानि की सूचना नहीं है।
ऑपरेशन की योजना थी पहले से तैयार
पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को कुछ दिनों से जानकारी मिल रही थी कि सीमा क्षेत्र के जंगलों में नक्सली गतिविधियां तेज हो रही हैं।
इसके बाद CRPF, DRG (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड) और STF (स्पेशल टास्क फोर्स) की संयुक्त टीम ने एक सुनियोजित सर्च ऑपरेशन शुरू किया था।
जैसे ही जवान जंगल के भीतर पहुंचे, छिपे हुए नक्सलियों ने अचानक हमला किया।
इसके बाद जो मुठभेड़ शुरू हुई, वह करीब 45 मिनट तक चली।
मारे गए नक्सली कौन?
अब तक जिन तीन नक्सलियों के शव बरामद हुए हैं, उनकी पहचान की प्रक्रिया जारी है।
पुलिस को शक है कि ये स्थानीय एरिया कमांडर रैंक के नक्सली हो सकते हैं।
बरामद सामग्री के आधार पर सुरक्षाबल यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि
- इनका संबंध किस नक्सली संगठन से था
- वे किन-किन क्षेत्रों में सक्रिय थे
- और उनका अगला लक्ष्य क्या हो सकता था
एसपी ने क्या कहा?
कांकेर एसपी कल्याण एलिसेला ने बताया:
“हमें विशिष्ट सूचना मिली थी, जिस पर हमारी टीम ने कार्रवाई की। मुठभेड़ में तीन नक्सली मारे गए हैं और उनके शव बरामद कर लिए गए हैं।
आगे भी ऑपरेशन जारी रहेगा जब तक कि पूरा इलाका सुरक्षित घोषित न कर दिया जाए।”
नक्सल मोर्चे पर यह एक बड़ी कामयाबी
छत्तीसगढ़ और ओडिशा की सीमा पर यह इलाका नक्सल गतिविधियों का संवेदनशील ज़ोन माना जाता है।
यहां पहले भी कई बार सुरक्षाबलों और माओवादियों के बीच मुठभेड़ हो चुकी हैं।
हाल के महीनों में राज्य में नक्सल विरोधी अभियानों में तेजी आई है। पिछले कुछ अभियानों में भी कई नक्सली मारे जा चुके हैं और उनके शिविर ध्वस्त किए गए हैं।
बरामदगी और सुरक्षाबलों की स्थिति
अब तक जो सामान बरामद हुआ है:
- 3 नक्सलियों के शव
- 2 भरमार बंदूकें और एक रायफल
- पर्चे, लेफ्ट विंग साहित्य
- पिट्ठू बैग्स, वायर, डेटोनेटर
- दवाईयां और भोजन सामग्री
- सुरक्षाबलों को कोई नुकसान नहीं हुआ है। सभी जवान सुरक्षित हैं।
बढ़ती है नक्सल विरोधी कार्रवाइयाँ
पिछले कुछ महीनों में छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियान तेज हुआ है।
राज्य सरकार और केंद्रीय बलों का उद्देश्य है कि 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले माओवाद पर निर्णायक नियंत्रण पाया जाए।
बीते 3 महीनों की प्रमुख मुठभेड़ें:
| तारीख | स्थान | मारे गए नक्सली |
|---|---|---|
| 22 जून 2025 | दंतेवाड़ा | 5 |
| 15 जुलाई 2025 | बीजापुर | 6 |
| 3 अगस्त 2025 | सुकमा | 4 |
| 29 सितंबर 2025 | कांकेर | 3 |
आगे की रणनीति
- सर्च ऑपरेशन पूरे क्षेत्र में जारी है
- नक्सलियों के ठिकानों का मानचित्रण (मैपिंग) किया जा रहा है
- ड्रोन और ट्रैकर डॉग्स की मदद से इलाके की निगरानी बढ़ाई गई है
- स्थानीय ग्रामीणों से संपर्क कर खुफिया इनपुट जुटाए जा रहे हैं
कांकेर की इस कार्रवाई को सुरक्षाबलों की एक और रणनीतिक सफलता माना जा रहा है।
यह न केवल माओवादियों को मनौवैज्ञानिक झटका देता है, बल्कि इलाके में स्थिरता और शांति की दिशा में बड़ा कदम भी है।
परंतु नक्सल चुनौती अब भी खत्म नहीं हुई है।
असली जीत तभी मानी जाएगी जब इन इलाकों में स्थायी विकास, शिक्षा और विश्वास की वापसी हो।



