Friday, March 6, 2026
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नेपाल हिंसा में मारे गए लोगों को शहीद का दर्जा, पीड़ित परिवारों को मिलेगा 10-10 लाख का मुआवजा

अंतरिम PM सुशीला कार्की बोलीं – 6 महीने में चुनाव कराकर सत्ता छोड़ दूंगी

काठमांडू : नेपाल में हालिया Gen-Z आंदोलन के दौरान मारे गए 51 लोगों को अब शहीद का दर्जा मिलेगा। अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने यह घोषणा कार्यभार संभालने के बाद की। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवारों को 10-10 लाख नेपाली रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी। मृतकों में एक भारतीय महिला भी शामिल है।

सुशीला कार्की ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, “नेपाल में पहली बार 27 घंटे तक लगातार आंदोलन चला। मैं इस बदलाव को सही दिशा में ले जाऊंगी और छह महीने के भीतर चुनाव कराकर सत्ता नवनिर्वाचित सरकार को सौंप दूंगी।”

हिंसा के बाद सियासी उथल-पुथल: तीन पूर्व प्रधानमंत्री हुए बेघर

9 सितंबर को प्रदर्शनकारियों ने पूर्व प्रधानमंत्रियों केपी शर्मा ओली, शेर बहादुर देउबा और पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ के घरों में आग लगा दी। इसके बाद तीनों नेता आर्मी कैंपों में शरण लेने को मजबूर हो गए हैं। उनके समर्थक अब नए किराए के मकानों की तलाश में जुटे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तीनों नेता कुछ समय के लिए काठमांडू से बाहर के शहरों, जैसे पोखरा, में रहना चाहते हैं।

नई सरकार का गठन: कुलमान घीसिंग सहित कई विशेषज्ञ हो सकते हैं मंत्री

प्रधानमंत्री कार्की अब नई कैबिनेट के गठन में जुट गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, वह 15 से अधिक सदस्यों वाली एक कार्यशील मंत्रिमंडल बना सकती हैं। जिन नामों पर विचार हो रहा है, उनमें शामिल हैं:

  • कुलमान घीसिंग – ऊर्जा विशेषज्ञ
  • ओम प्रकाश आर्यल – कानूनी विशेषज्ञ
  • बालानंद शर्मा – पूर्व सेना अधिकारी
  • आनंद मोहन भट्टराई – सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति
  • अशीम मान सिंह बसन्यात – प्रशासनिक विशेषज्ञ
  • डॉ. भगवान कोइराला, डॉ. संदुक रुइत, और डॉ. पुकार चंद्र श्रेष्ठ – चिकित्सा क्षेत्र से

मंत्रिमंडल के गठन में Gen-Z आंदोलनकारियों की राय भी अहम भूमिका निभा रही है। वे संभावित मंत्रियों के नामों पर ऑनलाइन वोटिंग के जरिए अपनी सहमति जता रहे हैं। कैबिनेट के रविवार शाम तक शपथ लेने की संभावना है, जो जरूरत पड़ने पर सोमवार तक टाली जा सकती है।

Gen-Z नेताओं का रुख: सत्ता में नहीं होंगे, मगर करेंगे निगरानी

Gen-Z नेताओं ने सरकार में शामिल होने से इनकार करते हुए स्पष्ट किया कि वे सत्ता का हिस्सा नहीं बनेंगे, लेकिन सरकार के कार्यों पर कड़ी निगरानी रखेंगे।

उधर, राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने शुक्रवार को संसद भंग करने की घोषणा की, जिसका UML पार्टी ने विरोध किया है। UML महासचिव शंकर पोखरेल ने कार्यकर्ताओं से सड़कों पर उतरने की अपील की है।

भारत, चीन और बांग्लादेश ने दी कार्की को बधाई

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार्की की नियुक्ति को महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बताया और कहा, “नेपाल की जनता ने मुश्किल समय में लोकतंत्र पर भरोसा बनाए रखा, भारत हमेशा उनके साथ है।”

इसके साथ ही चीन और बांग्लादेश ने भी कार्की को बधाई दी है। चीन ने नेपाल की राजनीतिक स्थिरता की उम्मीद जताई है, वहीं बांग्लादेश ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की और स्थिति पर करीबी नजर बनाए रखने की बात कही।

भू-राजनीतिक नजरिए से नेपाल भारत के लिए अहम: विशेषज्ञों की राय

पूर्व भारतीय राजदूत मीरा शंकर के अनुसार, “नेपाल भारत के लिए केवल सांस्कृतिक ही नहीं, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी बेहद अहम है। BRI (चीन) और MCC (अमेरिका) के जरिए दोनों शक्तियाँ नेपाल में अपना प्रभाव बढ़ा रही हैं, जो भारत के लिए चिंता का विषय है।”

नेपाल की हर राजनीतिक हलचल का सीधा असर भारत पर पड़ता है, इसलिए वहां की स्थिरता भारत के लिए जरूरी है।

स्थिति धीरे-धीरे सामान्य, कई इलाकों में कर्फ्यू हटा

लगातार 6 दिन की हिंसा के बाद नेपाल के हालात अब सामान्य होते दिख रहे हैं। काठमांडू के कई इलाकों से कर्फ्यू हटा दिया गया है और पब्लिक ट्रांसपोर्ट दोबारा शुरू हो गया है। भारत-नेपाल सीमा पर भी आवाजाही फिर से शुरू हो गई है।

हालांकि, काठमांडू के 6 संवेदनशील क्षेत्रों में अब भी कर्फ्यू लागू है। प्रशासन ने आदेश दिया है कि वहां दो महीने तक किसी भी प्रकार के प्रदर्शन, जुलूस या जनसभा की अनुमति नहीं दी जाएगी।

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