अनुराग ठाकुर का आरोप – “राहुल अब विपक्ष के नहीं, भारत विरोध के नेता बन गए हैं”; कांग्रेस पर भी गिरी राजनीतिक तलवार
नई दिल्ली | भारत के नए उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन के शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की अनुपस्थिति को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है।
भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने राहुल पर तीखा हमला करते हुए कहा कि वह “अब विपक्ष के नहीं, भारत विरोध के नेता बन चुके हैं”।
अनुराग ठाकुर का आरोप: “जहाँ ज़रूरत है, वहाँ राहुल नहीं होते”
लोकसभा में भाजपा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने पत्रकारों से बातचीत में कहा:“जब संसद चल रही होती है, तो राहुल गांधी नदारद रहते हैं।
जब देश स्वतंत्रता दिवस मनाता है, तो वह लाल किले पर नहीं दिखते।और जब उपराष्ट्रपति शपथ ले रहे हैं, तो विपक्ष के नेता के रूप में भी उनकी गैरमौजूदगी है।”.ठाकुर ने यह भी कहा कि जनता ने उन्हें तीसरी बार नेता प्रतिपक्ष बनने का मौका दिया है, लेकिन वे विपक्ष का नेतृत्व नहीं, विरोध की राजनीति का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
“राहुल गांधी भारत विरोध की राजनीति में सबसे आगे हैं,” — उन्होंने आरोप लगाया।
.भाजपा का दूसरा वार: कांग्रेस पर ‘मानसिक असंतुलन’ का आरोप
केवल राहुल गांधी ही नहीं, कांग्रेस पार्टी भी भाजपा के निशाने पर रही। भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने बिहार कांग्रेस द्वारा पोस्ट किए गए एक AI जनरेटेड वीडियो को लेकर पार्टी पर हमला बोला।
वीडियो में कथित तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी दिवंगत मां को लेकर आपत्तिजनक दृश्य दिखाए गए थे।
दिनेश शर्मा ने कहा: “कांग्रेस अब अपना मानसिक संतुलन खो चुकी है। प्रधानमंत्री की छवि को नुकसान पहुँचाने के लिए अभद्र तरीकों का इस्तेमाल हो रहा है।
संवैधानिक संस्थाओं और पदों का निरंतर अपमान कांग्रेस की नई शैली बन चुकी है।”
उपराष्ट्रपति का शपथ समारोह: गरिमामय लेकिन विपक्ष के बिना
शुक्रवार शाम राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सीपी राधाकृष्णन को देश के 14वें उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति के रूप में शपथ दिलाई।
शपथ के बाद उन्होंने:
- महात्मा गांधी,
- पंडित दीन दयाल उपाध्याय,
- अटल बिहारी वाजपेयी
- और चौधरी चरण सिंह की समाधियों पर पुष्प अर्पित किए।
बाद में वे संसद भवन पहुंचे जहां केंद्रीय मंत्रियों, राज्यसभा उपसभापति हरिवंश और महासचिव ने उनका स्वागत किया।
हालाँकि विपक्ष के कई प्रमुख चेहरे इस समारोह में अनुपस्थित रहे, जिसमें राहुल गांधी का नाम सबसे प्रमुख रहा।
राजनीतिक विश्लेषण: चुप्पी भी कभी-कभी बयान बन जाती है
राहुल गांधी की अनुपस्थिति को लेकर कांग्रेस की ओर से अब तक कोई औपचारिक बयान नहीं आया है।
इस चुप्पी ने भाजपा को हमला करने का अवसर दिया, और अब सवाल उठ रहा है:
- क्या यह गैरहाज़िरी एक नीतिगत असहमति का संकेत है?
- या यह केवल कार्यक्रम में शामिल न हो पाने की व्यक्तिगत वजह?
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, शपथ ग्रहण जैसे संवैधानिक आयोजनों में विपक्ष के नेता की उपस्थिति प्रोटोकॉल से कहीं ज़्यादा, एक प्रतीकात्मक जिम्मेदारी होती है।



