चंडीगढ़/रोहतक। हरियाणा के सीनियर IPS अधिकारी वाई. पूरन कुमार की संदिग्ध आत्महत्या को सात दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक उनका पोस्टमॉर्टम नहीं हो पाया है। मामले में सियासी और सामाजिक दबाव बढ़ने के बीच राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए DGP शत्रुजीत कपूर को छुट्टी पर भेज दिया है। कपूर की जगह IPS ओम प्रकाश सिंह को कार्यवाहक DGP का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। गृह विभाग ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिए हैं।
DGP का नाम आया था अंतिम पत्र में
दिवंगत अफसर के ‘सुसाइड नोट’ में DGP शत्रुजीत कपूर, रोहतक के तत्कालीन SP नरेंद्र बिजारणिया समेत अन्य अधिकारियों का नाम सामने आने के बाद मामला गंभीर हो गया था। वाई. पूरन कुमार की पत्नी, वरिष्ठ IAS अधिकारी अमनीत पी. कुमार लगातार DGP को पद से हटाने और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग पर अड़ी हुई हैं। सरकार ने पहले ही SP बिजारणिया को पद से हटा दिया था, लेकिन अभी तक उनकी नई पोस्टिंग नहीं हुई है।
पोस्टमॉर्टम को लेकर परिजनों की नाराज़गी
मृतक अफसर का परिवार और अनुसूचित जाति समाज से जुड़ी 31 सदस्यीय कमेटी लगातार पोस्टमॉर्टम रोक कर बैठी हुई है। वे मांग कर रहे हैं कि जब तक आरोपियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक पोस्टमॉर्टम नहीं होने देंगे। महापंचायत द्वारा सरकार को दिया गया 48 घंटे का अल्टीमेटम भी आज समाप्त हो रहा है। कमेटी ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
सियासी हलचल तेज
मामले की गंभीरता को देखते हुए नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी आज थोड़ी देर में अमनीत पी. कुमार के सरकारी आवास पर पहुंचकर शोक प्रकट करेंगे। वहीं, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान भी दोपहर डेढ़ बजे मुलाकात करने वाले हैं। इससे पहले सोमवार को केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले भी पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे थे और इसके बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से 40 मिनट की मुलाकात की थी। अठावले ने बताया कि मुख्यमंत्री ने कार्रवाई का भरोसा दिलाया है, लेकिन उससे पहले पोस्टमॉर्टम आवश्यक है।
PM का प्रस्तावित दौरा रद्द, मुख्यमंत्री ने टाली दिल्ली यात्रा
इस संवेदनशील माहौल के चलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 17 अक्टूबर को सोनीपत का प्रस्तावित दौरा रद्द कर दिया गया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी अपनी दिल्ली यात्रा स्थगित कर दी है।
IPS वाई. पूरन कुमार की मौत अब केवल एक आत्महत्या का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह हरियाणा की प्रशासनिक पारदर्शिता, पुलिस तंत्र की जवाबदेही और सामाजिक न्याय से जुड़ा एक बड़ा सवाल बन चुका है। आने वाले 24-48 घंटे इस पूरे घटनाक्रम के लिए निर्णायक हो सकते हैं।



