Friday, March 6, 2026
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मैनचेस्टर में खून से सना प्रार्थना स्थल: आतंकी हमला दुनिया के ज़मीर पर एक तमाचा

भारत ने दी चेतावनी — “अब नहीं जागे तो बहुत देर हो जाएगी…”

मैनचेस्टर/नई दिल्ली| दुनिया जब अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दे रही थी, उसी दिन मैनचेस्टर के शांत इलाके हीटन पार्क में प्रार्थना कर रहे यहूदी समुदाय पर एक बर्बर आतंकी हमला हुआ।

योम किप्पुर — यहूदी धर्म के सबसे पवित्र दिन — की प्रार्थना सभा के दौरान एक हमलावर ने सिनेगॉग के बाहर पहले कार से श्रद्धालुओं को कुचला, फिर बाहर निकल कर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। इस भयावह हमले में दो लोगों की मौत हो गई और चार अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।

आतंक का चेहरा: सीरियाई मूल का ब्रिटिश नागरिक

ग्रेटर मैनचेस्टर पुलिस ने हमलावर की पहचान 35 वर्षीय जिहाद अल-शमी के रूप में की है, जो सीरियाई मूल का ब्रिटिश नागरिक है।

हमले के तुरंत बाद पुलिस को आशंका थी कि उसके पास विस्फोटक हो सकते हैं, क्योंकि उसने भारी जैकेट पहन रखी थी। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षाबलों ने उसे गोली मार दी। बाद में यह स्पष्ट हुआ कि उसके पास कोई विस्फोटक नहीं था।

घटना के बाद तीन अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया — दो पुरुष (30 वर्ष) और एक महिला (60 वर्ष), जिन पर आतंकवाद से संबंधित अपराधों में संलिप्तता का संदेह है।

मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने इस हमले को आधिकारिक रूप से आतंकवादी हमला घोषित कर दिया है।

भारत का तीखा बयान: ‘यह मानवता पर सीधा हमला है’

भारत ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे एक बार फिर वैश्विक आतंकवाद के बढ़ते खतरे की गहरी चेतावनी बताया।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ‘एक्स’ (पूर्व ट्विटर) पर लिखा:

“यह विशेष रूप से पीड़ादायक है कि यह जघन्य हमला अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के दिन हुआ। यह आतंकवाद की दुष्ट ताकतों द्वारा मानवता को दी गई एक और गहरी चोट है। भारत इस दुख की घड़ी में ब्रिटेन के लोगों के साथ मजबूती से खड़ा है।”

भारत ने यह भी दोहराया कि अब समय आ गया है कि दुनिया आतंकवाद के ख़िलाफ़ राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठकर एकजुट हो और निर्णायक कार्रवाई करे।

ब्रिटिश प्रधानमंत्री का संकल्प: ‘करुणा, सुरक्षा और एकता का ब्रिटेन बनाएंगे’

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने हमले की तीखी आलोचना की और कहा कि यहूदी समुदाय को उनकी आस्था के आधार पर निशाना बनाना, ब्रिटिश मूल्यों पर हमला है।

उन्होंने ब्रिटेन के नागरिकों को संबोधित करते हुए कहा:

“मैं यहूदी समुदाय से कहना चाहता हूं — आप अकेले नहीं हैं। यह देश आपका घर है। हम आपकी सुरक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएंगे।”

उन्होंने यह भी जोड़ा:

“आने वाले दिनों में आप एक ऐसा ब्रिटेन देखेंगे जो करुणा, शालीनता और प्रेम से प्रेरित होगा — एक ऐसा देश जो घृणा को अस्वीकार कर, अपने नागरिकों को गले लगाता है।”

जब प्रार्थना पर हमला होता है…

यह हमला केवल निर्दोष लोगों पर नहीं था, बल्कि एक विचार पर हमला था — आस्था, शांति और सह-अस्तित्व के विचार पर।

योम किप्पुर, जो कि आत्मनिरीक्षण, क्षमा और आध्यात्मिक शुद्धि का प्रतीक है, उसी दिन जब यह हमला हुआ, तो वह पूरी दुनिया को यह याद दिलाता है कि धार्मिक स्थलों पर हिंसा केवल लोगों को नहीं मारती, वह इंसानियत की आत्मा को भी घायल करती है।

क्या यह वैश्विक जागृति का क्षण है?

भारत और ब्रिटेन — दोनों लोकतांत्रिक, बहुधार्मिक और बहुसांस्कृतिक देश — आतंकवाद की मार झेल चुके हैं।
अब यह केवल सुरक्षा या कूटनीति का मामला नहीं है, बल्कि मानवता की रक्षा का सवाल है।

भारत का संदेश स्पष्ट है —

“टेररिज्म को धर्म, रंग या देश की सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता। अब समय आ गया है कि विश्व समुदाय इसे केवल ‘नीति’ का नहीं, बल्कि ‘नैतिकता’ का मुद्दा माने।”

जब मंदिर, मस्जिद, चर्च और सिनेगॉग सुरक्षित नहीं, तो कौन है सुरक्षित?

इस हमले ने यह भी उजागर किया है कि जब पूजा स्थल भी निशाने पर आने लगें, तो यह केवल सुरक्षा का मामला नहीं, बल्कि सांस्कृतिक अस्तित्व और सामाजिक सहिष्णुता की रक्षा का प्रश्न बन जाता है।

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