पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने बुधवार को अपने 57 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी। सूची में पार्टी ने सियासी समीकरण साधते हुए 6 मौजूदा मंत्रियों को फिर से मैदान में उतारा है, वहीं 3 बाहुबली चेहरों को भी टिकट देकर स्पष्ट कर दिया है कि वह जीत के लिए हर समीकरण साधने को तैयार है।
बाहुबली चेहरे फिर से मैदान में
पार्टी ने मोकामा से अनंत सिंह, एकमा से धूमल सिंह और कुचायकोट से अमरेंद्र पांडे को उम्मीदवार बनाया है। ये तीनों ही अपने-अपने क्षेत्रों में दबदबे वाले और आपराधिक छवि के लिए पहचाने जाने वाले चेहरे हैं, जिन्हें जेडीयू ने दोबारा मौका देकर संकेत दिया है कि ज़मीनी पकड़ अब भी निर्णायक है।
6 मंत्रियों पर दोबारा भरोसा
पार्टी ने अपने छह मंत्रियों को फिर से चुनावी मैदान में उतारा है:
- विजय कुमार चौधरी – सरायरंजन
- श्रवण कुमार – नालंदा
- मदन सहनी – बहादुरपुर
- महेश्वर हजारी – कल्याणपुर
- सुनील कुमार – भोरे
- रत्नेश सदा – सोनबरसा
सरायरंजन सीट को लेकर अटकलें थीं कि विजय चौधरी के बेटे को टिकट मिल सकता है, लेकिन अंततः पार्टी ने अनुभवी मंत्री पर ही भरोसा कायम रखा।
चिराग के गढ़ में भी चुनौती
लोजपा (रामविलास) प्रमुख चिराग पासवान के गृह क्षेत्र अलौली से भी जेडीयू ने अपना प्रत्याशी उतार दिया है। माना जा रहा है कि यह सीट चिराग पासवान के लिए प्रतिष्ठा का विषय है और जेडीयू यहां कड़ा मुकाबला देने की रणनीति पर काम कर रही है।
2020 में 12 वोट से जीतने वाले को फिर मौका
हिलसा सीट से कृष्ण मुरारी शरण उर्फ प्रेम मुखिया, जिन्हें 2020 में सिर्फ 12 वोटों से जीत मिली थी, उन्हें फिर से टिकट दिया गया है। यह पार्टी के अपने पुराने सिपाहियों पर भरोसा जताने का संकेत माना जा रहा है।
नीतीश पर फिर से दांव, NDA की एकजुटता
2025 के चुनाव को लेकर NDA की रणनीति स्पष्ट हो चुकी है—मुख्यमंत्री चेहरा नीतीश कुमार ही होंगे। जेडीयू, भाजपा, लोजपा (रामविलास) और HAM के नेता जीतन राम मांझी इस पर सहमत हैं। जेडीयू का नया नारा है:
“2025 से 2030… फिर से नीतीश।”
2020 चुनाव से जुड़े 5 अहम तथ्य
- JDU-BJP की साथ वापसी:
2015 में महागठबंधन का हिस्सा रही जेडीयू ने 2017 में NDA में वापसी की और 2020 का चुनाव BJP के साथ मिलकर लड़ा। - लेफ्ट पार्टियों की बड़ी भागीदारी:
2020 में पहली बार CPI (ML) को महागठबंधन में 29 सीटें मिलीं, जिसमें से उसने 12 पर जीत दर्ज की। - तेजस्वी यादव का नेतृत्व:
RJD नेता तेजस्वी यादव ने 10 लाख सरकारी नौकरी देने का वादा किया, जिससे युवा वोटर उनके पक्ष में लामबंद हुए। - गठबंधन में दरार:
VIP और HAM पार्टी ने सीट बंटवारे से नाराज होकर महागठबंधन छोड़ दिया और NDA में शामिल हो गए। VIP प्रमुख मुकेश सहनी ने RJD पर धोखा देने का आरोप लगाया। - कोविड काल का चुनाव:
चुनाव कोविड महामारी के दौरान हुआ था। प्रवासी मजदूरों के मुद्दे को महागठबंधन ने प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाया, जिसका असर ग्रामीण क्षेत्रों में दिखा।
जेडीयू इस बार 101 सीटों पर लड़ेगी चुनाव
2020 में जेडीयू ने 115 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 43 पर जीत हासिल की थी। इस बार सीटें घटाकर 101 की गई हैं, ताकि गठबंधन संतुलन बरकरार रहे।



