Friday, March 6, 2026
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बिहार चुनाव में गरमाई सियासत: चिराग पासवान बोले – “RJD कभी मुस्लिम CM के लिए तैयार नहीं रही”

पीएम मोदी ने छठ पर साझा किया शारदा सिन्हा का गीत, NDA ने तेज़ किया प्रचार

पटना। बिहार की राजनीति एक बार फिर बयानबाज़ी और धार्मिक-सामाजिक मुद्दों के इर्द-गिर्द घूम रही है।
महागठबंधन द्वारा तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री और मुकेश सहनी को डिप्टी सीएम फेस घोषित करने के बाद से राजनीतिक हलचल तेज़ हो गई है।
इस बीच केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने एक पुराना और संवेदनशील मुद्दा उठाकर विपक्ष को घेरने की कोशिश की है।

चिराग पासवान का बड़ा हमला: “RJD मुस्लिम मुख्यमंत्री के लिए कभी तैयार नहीं रही”

लोजपा (रामविलास) प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने सोशल मीडिया पर लिखा —

“2005 में मेरे पिता स्वर्गीय रामविलास पासवान जी ने मुस्लिम मुख्यमंत्री बनाने के लिए अपनी पार्टी तक कुर्बान कर दी थी, तब भी RJD ने उनका साथ नहीं दिया। आज भी वे मुस्लिम समाज को केवल बंधुआ वोट बैंक की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं।”

यह बयान बिहार की राजनीति में मुस्लिम प्रतिनिधित्व और धर्मनिरपेक्षता बनाम सियासी लाभ के पुराने सवालों को फिर से चर्चा में ला रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चिराग पासवान का यह बयान महागठबंधन के मुस्लिम वोट बैंक में दरार डालने की कोशिश हो सकती है।

2005 की यादें फिर ताज़ा

2005 के बिहार विधानसभा चुनाव में रामविलास पासवान ने उस समय के राजनीतिक समीकरणों को झकझोर दिया था।
उन्होंने मुशर्रफ हुसैन जैसे मुस्लिम चेहरे को मुख्यमंत्री बनाने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन RJD और कांग्रेस दोनों ने इस पर सहमति नहीं जताई थी।
आख़िरकार, पासवान ने अपनी पार्टी के हितों से ऊपर उठकर यह मुद्दा उठाया — और इसी को अब चिराग दोहरा रहे हैं।

छठ पर पीएम मोदी का संदेश: “प्रकृति, आस्था और प्रेम का संगम”

चुनावी माहौल के बीच बिहार और पूर्वांचल में छठ महापर्व की शुरुआत का उल्लास छाया हुआ है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं और लोकगायिका शारदा सिन्हा का मशहूर छठ गीत साझा किया।

मोदी ने पोस्ट में लिखा —

“छठ महापर्व आस्था, उपासना और प्रकृति प्रेम का अनूठा संगम है। इसमें जहां अस्ताचलगामी और उदीयमान सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है, वहीं प्रसाद में भी प्रकृति के विविध रंग समाहित होते हैं।”

उन्होंने कुल 6 पोस्ट्स में छठ की परंपराओं, पर्यावरणीय महत्व और सांस्कृतिक एकता पर जोर दिया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पीएम मोदी का यह संदेश बिहार की भावनात्मक धारा से जुड़ने का एक सधे हुए अंदाज़ में दिया गया संकेत है।

NDA का चुनावी अभियान तेज़: नीतीश कुमार बक्सर में, शाह की सभा में महिलाओं का विरोध

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज बक्सर के डुमरांव में चुनावी सभा कर रहे हैं।
उनके साथ बीजेपी के कई सांसद और केंद्रीय मंत्री भी मौजूद हैं।
इससे पहले वे समस्तीपुर में प्रधानमंत्री मोदी की रैली में शामिल हुए थे।

वहीं, बक्सर में गृह मंत्री अमित शाह की सभा के दौरान कुछ महिलाओं ने नाराजगी जताई।
उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ उन्हें नहीं मिल रहा और सभा स्थल छोड़कर लौट गईं।
महिलाओं ने बैनर फाड़ते हुए कहा — “हमें बुलाया तो गया, लेकिन वादे पूरे नहीं हुए।”

दूसरी ओर, केंद्रीय राज्यमंत्री सतीश चंद्र दुबे ने RJD नेता तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए कहा —

“तेजस्वी यादव के सोचने से कुछ नहीं होता, वो तो ‘मुंगेरीलाल के हसीन सपने’ देख रहे हैं।”

मनोज तिवारी बोले – “पवन सिंह लोकसभा से लड़ेंगे चुनाव, विधानसभा से नहीं”

भोजपुरी सिनेमा के दो बड़े नाम, मनोज तिवारी और पवन सिंह, एक बार फिर राजनीतिक सुर्खियों में हैं।
बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि पवन सिंह विधानसभा चुनाव नहीं लड़ना चाहते।

“पवन सिंह लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं। उन्हें आसनसोल से टिकट हमने ही दिलवाया था, और आगे उन्हें सही जगह से चुनाव लड़वाएंगे।”

मनोज तिवारी ने दावा किया कि इस बार NDA 175 से ज्यादा सीटों पर जीत दर्ज करेगा।
उन्होंने कहा — “हम जनता से 200 सीट की मांग कर रहे हैं, और जनता का रुझान हमारे पक्ष में है।”

राजनीतिक परिप्रेक्ष्य: वोट बैंक, भावनाएं और रणनीति

बिहार की राजनीति में इस वक्त तीन परतें साफ़ दिख रही हैं —

  1. धर्म और प्रतिनिधित्व: चिराग पासवान के बयान से मुस्लिम समाज की राजनीतिक भागीदारी का सवाल फिर चर्चा में है।
  2. सांस्कृतिक जोड़: पीएम मोदी का छठ संदेश जनता से भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक बन रहा है।
  3. स्थानीय असंतोष: बक्सर की महिलाओं का विरोध यह दिखाता है कि योजनाओं का लाभ ज़मीनी स्तर तक नहीं पहुँचा है।

विश्लेषकों के अनुसार, आने वाले दिनों में RJD और NDA दोनों को वोट बैंक की एकता और स्थानीय मुद्दों के बीच संतुलन साधना होगा।

बिहार की सियासत इस समय धार्मिक भावनाओं, जातीय समीकरणों और सामाजिक प्रतिनिधित्व के बीच झूल रही है।
जहां एक ओर महागठबंधन तेजस्वी यादव को युवा चेहरा बनाकर पेश कर रहा है, वहीं NDA नेतृत्व नीतीश कुमार के अनुभव और मोदी के चेहरे पर भरोसा जता रहा है।
चिराग पासवान का बयान इस चुनाव में नया विमर्श जोड़ रहा है — कि क्या बिहार में धर्म आधारित प्रतिनिधित्व केवल राजनीतिक नारा है, या अब भी अपूर्ण सपना?

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