Friday, March 6, 2026
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बरेली हिंसा पर सियासत गरमाई: AAP नेताओं को हाउस अरेस्ट, अखिलेश यादव कल कर सकते हैं दौरा

बरेली, उत्तर प्रदेश | बरेली में 26 सितंबर को हुई हिंसा के बाद मामला अब राजनीतिक रंग ले चुका है। मंगलवार को आम आदमी पार्टी (AAP) का 16 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल पीड़ित परिवारों से मुलाकात के लिए बरेली रवाना होने वाला था, लेकिन रवाना होने से पहले ही प्रशासन ने प्रतिनिधिमंडल के सभी सदस्यों को उनके-उनके जिलों में हाउस अरेस्ट कर लिया।

इस घटना के बाद राज्य की योगी सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई है। AAP नेताओं ने सरकार पर “तानाशाही रवैया अपनाने” और “अपराध पर पर्दा डालने” का आरोप लगाया है। वहीं समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव के बुधवार को बरेली पहुंचने की संभावना जताई जा रही है, जिससे सियासी हलचल और तेज़ हो सकती है।

AAP नेताओं का आरोप: प्रशासनिक दमन और लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा

मेरठ से AAP जिलाध्यक्ष अंकुश चौधरी ने बयान जारी कर कहा,

“बीजेपी सरकार प्रदेश में अपराध रोकने में पूरी तरह विफल रही है। जब विपक्ष पीड़ितों से मिलने जाता है तो प्रशासन पूरी ताकत से रोकने आ जाता है। यह लोकतंत्र का गला घोंटना है। योगी सरकार अपनी नाकामी छिपाने के लिए विपक्षी नेताओं की आवाज दबा रही है।”

गाजियाबाद में AAP पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ की अध्यक्ष डॉ. छवि यादव ने देर रात एक वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने बताया कि रात करीब 11 बजे पुलिस उनके आवास पर पहुंच गई और तब से वे नजरबंद हैं।

“हमारा गुनाह सिर्फ इतना है कि हम पीड़ितों से मिलने जा रहे थे। क्या लोकतंत्र में यह अपराध है? योगी सरकार महिलाओं पर हो रहे अत्याचार रोकने में इतनी तत्परता दिखाए तो प्रदेश की तस्वीर बदल सकती है। लेकिन यहां तो सवाल पूछने वालों को ही चुप कराया जा रहा है।”

बरेली हिंसा: क्या है मामला?

26 सितंबर को बरेली में दो समुदायों के बीच तनाव के चलते हिंसा भड़क उठी थी। कई जगह पथराव, आगज़नी और तोड़फोड़ की घटनाएं हुई थीं। स्थानीय प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया और इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद कर दी गईं। इस मामले में अब तक कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, लेकिन विपक्ष का आरोप है कि प्रशासन की कार्रवाई एकतरफा और पक्षपातपूर्ण रही है।

सियासत तेज, निगाहें अखिलेश के दौरे पर

अब नजरें समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के संभावित बरेली दौरे पर टिकी हैं। यदि वे पीड़ित परिवारों से मुलाकात करते हैं, तो यह घटना और बड़ा राजनीतिक मोड़ ले सकती है। फिलहाल AAP ने ऐलान किया है कि अगर उन्हें मिलने नहीं दिया गया, तो पार्टी राज्यव्यापी आंदोलन की योजना बना सकती है।

प्रशासन की चुप्पी सवालों के घेरे में

अब तक प्रशासन की ओर से हाउस अरेस्ट पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। न ही यह स्पष्ट किया गया है कि किन आदेशों के तहत यह कार्रवाई की गई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की रोक जन प्रतिनिधियों के लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन हो सकती है, जब तक कि इसके पीछे स्पष्ट सुरक्षा कारण न हों।

बरेली हिंसा की आग अब सियासी मोर्चे पर भी भड़क चुकी है। विपक्ष जहां इसे लोकतंत्र की हत्या बता रहा है, वहीं शासन की चुप्पी इस पूरे मामले को और भी रहस्यमय बना रही है। आने वाले 48 घंटे उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं।

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