Friday, March 6, 2026
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नोएडा प्राधिकरण की रिपोर्ट का निरीक्षण करेगी समिति:SC ने यूपीपीसीबी और सीपीसीबी की बनाई एक समिति, ड्रेन को गंदा करने पर लगा था 100 करोड़ जुर्माना

नोएडा : यमुना नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। कोंडली ड्रेन यमुना को प्रदूषित करने में अपनी अहम भूमिका अदा कर रहा है। एनजीटी ने नोएडा प्राधिकरण पर 100 करोड़ का जुर्माना लगाया था। साथ ही ड्रेन में ट्रीटेड और अनट्रीटेड दोनों तरह के पानी नहीं डालने का निर्देश दिया था। इस पर प्राधिकरण ने सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल किया है। इस मामले में 13 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने यूपीपीसीबी और सीपीसीबी की एक समिति बनाने का निर्देश दिया।

समिति देगी अपनी रिपोर्ट

समिति प्राधिकरण द्वारा कोर्ट में कोंडली ड्रेन को लेकर जमा की गई रिपोर्ट का जमीनी स्तर पर वेरीफिकेशन करेंगे और अपनी रिपोर्ट कोर्ट में सब्मिट करेंगे। पर्यावरणविद् अभिष्ट कुसुम गुप्ता ने बताया कि प्राधिकरण ने जो स्टेटस रिपोर्ट जमा की उसमें 30 छोटे बड़े नालों का जिक्र किया गया है। इसमें से 6 नाले सूखे दिखाए गए और 5 नालों को बंद कर दिया गया है। बाकी 19 पर काम किया जा रहा है। इसी रिपोर्ट की जमीनी निरीक्षण किया जाएगा।

अक्टूबर में होगी अगली सुनवाई

अभिष्ठ गुप्ता ने बताया कि एनजीटी के आदेश के खिलाफ नोएडा प्राधिकरण ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी। इसमें प्राधिकरण ने दावा किया है कि शहर में 8 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट एसटीपी कार्यरत हैं, जिनकी कुल क्षमता प्रतिदिन 411 मिलियन लीटर डेली (एमएलडी) है।

नोएडा प्राधिकरण ने ये भी कहा है कि 120 एमएलडी ट्रीटेड सीवेज पानी को नोएडा के अलग-अलग सेक्टरों में ग्रीन एरिया में सिंचाई के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। बाकी सीवरेज पानी को ट्रीट करने के बाद एनटीपीसी का लेना था। लेकिन ये कार्य अब तक शुरू नहीं हो सका है। इस मामले में अगली सुनवाई 28 अक्टूबर 2025 होगी। तब तक एजेंसी अपनी रिपोर्ट कोर्ट में सब्मिट करेगी।

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