प्रचंड सरकार ने चीफ जस्टिस रहते महाभियोग लाने की कोशिश की थी, अब वहीं जनता ने PM बना दिया
काठमांडू : नेपाल ने इतिहास रच दिया है। देश की 220 सालों की राजनीतिक यात्रा में पहली बार एक महिला प्रधानमंत्री बनी हैं — सुशीला कार्की। वे सिर्फ नेपाल की ही नहीं, पूरे दक्षिण एशिया में सबसे साहसी और निडर न्यायाधीशों में एक रही हैं। अब, वे संक्रमणकालीन दौर में नेपाल की कमान संभालेंगी, उस समय जब देश नई दिशा की तलाश में है।
उनकी नियुक्ति तब हुई है जब Gen-Z प्रदर्शनकारियों और सिविल सोसाइटी ने उन्हें लोकतंत्र, न्याय और पारदर्शिता की प्रतीक मानकर आगे बढ़ाया। शुक्रवार रात राष्ट्रपति भवन में उन्होंने शपथ ली।
कौन हैं सुशीला कार्की?
- पूर्व नेपाल सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश
- भ्रष्टाचार के खिलाफ कठोर रुख, राजनेताओं के सामने कभी नहीं झुकीं
- सरोगेसी के धंधे पर रोक लगाने जैसे कई ऐतिहासिक फैसले
- प्रचंड सरकार ने जब इन्हें हटाने की कोशिश की, जनता सड़कों पर उतर आई
- पति रहे हैं नेपाल के पहले प्लेन हाईजैकिंग केस के आरोपी
जस्टिस से जननेता तक का सफर
सुशीला कार्की ने अपने करियर की शुरुआत एक शिक्षिका के रूप में की थी। लेकिन उन्हें असली पहचान मिली जब वे न्यायपालिका से जुड़ीं। 2016 में वे नेपाल की पहली महिला चीफ जस्टिस बनीं — और ये केवल एक औपचारिक उपलब्धि नहीं थी। उन्होंने न्यायपालिका को सत्ता की कठपुतली बनने से रोका।
2017: जब संसद में लाया गया था उनके खिलाफ महाभियोग
प्रचंड के नेतृत्व वाली सरकार ने उन पर “राजनीतिक फैसलों में हस्तक्षेप” का आरोप लगाकर महाभियोग प्रस्ताव लाया। पर सच यह था कि वे सत्ता के भ्रष्टाचार के खिलाफ बेहिचक फैसले दे रही थीं।
- संसद के कदम के विरोध में हजारों नागरिक, छात्र, महिलाएं और बुद्धिजीवी सड़कों पर उतर आए।
- सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि महाभियोग लंबित रहने तक वे अपने पद पर बनी रहेंगी।
- संसद को एक दिन पहले, उनके रिटायरमेंट से ठीक पहले, महाभियोग वापस लेना पड़ा।
.उनके कुछ ऐतिहासिक फैसले:
सरोगेसी पर रोक:
2015 में उन्होंने कहा —
“सरोगेसी को व्यापार नहीं बनने दिया जा सकता। यह महिलाओं के शोषण का माध्यम बन रहा है।”
इसके बाद नेपाल सरोगेसी टूरिज्म का केंद्र बनने से बच गया, और सरकार को कानून लाने पर मजबूर होना पड़ा।

पति का अतीत: नेपाल की पहली प्लेन हाइजैकिंग
सुशीला कार्की के पति दुर्गा प्रसाद सुबेदी भी कम चर्चित नहीं रहे हैं। वे 10 जून 1973 को हुई नेपाल की पहली विमान अपहरण घटना के प्रमुख किरदार थे। इस घटना में—
- विमान में 22 यात्री थे, जिनमें बॉलीवुड एक्ट्रेस माला सिन्हा और उनके पति सीपी लोहानी भी थे।
- दुर्गा ने दो साथियों के साथ मिलकर सरकारी खजाने के 32 लाख रुपये लूटे, जो आंदोलन के लिए इस्तेमाल हुए।
- ये हाईजैकिंग भारत के फारबिसगंज में अंजाम दी गई, और फिर कैश दार्जिलिंग के रास्ते तस्करों को सौंपा गया।
- बाद में दुर्गा सुबेदी को भारत में गिरफ्तार किया गया और 2 साल बाद रिहा हुए।
लेकिन यह अतीत कभी भी सुशीला कार्की की छवि पर दाग नहीं लगा सका। उन्होंने अपनी पहचान खुद गढ़ी, और कानून के दायरे में रहकर जनसेवा की।
.बीएचयू में पढ़ाई, गंगा किनारे की यादें
सुशीला कार्की ने वाराणसी के बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से शिक्षा ली थी। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था—
“गर्मियों की रातें गंगा किनारे हॉस्टल की छत पर बिताई हैं। आज भी वो दृश्य याद आता है तो मन भावुक हो जाता है।”
वे हिंदी भी जानती हैं, हालांकि उतनी प्रवाहपूर्ण नहीं, पर भारत से उनका गहरा जुड़ाव हमेशा बना रहा।
.भारत-नेपाल संबंधों पर क्या सोचती हैं सुशीला?
“भारत और नेपाल का रिश्ता भावनाओं का है, सिर्फ सीमाओं का नहीं। सरकारें बदलती हैं, पर जनता का प्रेम स्थायी होता है।”
उनके अनुसार, “बर्तन साथ रखेंगे तो आवाज़ तो होगी, लेकिन रिश्ता टूटेगा नहीं।”
उन्होंने कहा था कि उनके कई रिश्तेदार भारत में रहते हैं और नेपाल के लोग भारत के दुख-दर्द को अपना समझते हैं।



