स्वामी के नाम पर ‘शैतान’, 17 छात्राओं ने खोलीं शर्मनाक करतूतें
नई दिल्ली | दिल्ली की चमचमाती बिल्डिंगों और ऊँची डिग्रियों के पीछे, एक सन्नाटा छिपा था — डर, शोषण और चुप्पी का सन्नाटा।
देश की राजधानी में स्थित श्री शारदा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन मैनेजमेंट, जहां छात्राएं अपने सपनों को उड़ान देने आई थीं, वहां उनका सामना हुआ एक ऐसे ‘स्वामी’ से, जो असल में शोषण का पर्याय निकला।
‘स्वामी’ चैतन्यानंद या ‘शोषणनंद’?
👉 असली नाम: पार्थ सारथी
👉 पद: संस्थान प्रमुख (अब बर्खास्त)
👉 आरोप:
- अश्लील मैसेज भेजना
- गंदी बातें करना
- छात्राओं को जबरन छूना
- स्कॉलरशिप रोकने की धमकी देना
इतना ही नहीं, छात्राओं का दावा है कि महिला फैकल्टी और कर्मचारी भी इस शोषण में मौन समर्थन कर रही थीं।
उन्हें कहा जाता था:
“वार्डन हमें खुद उसके पास लेकर गई थीं” – पीड़ित छात्रा
इन छात्राओं का जुर्म सिर्फ इतना था कि वो गरीब थीं, और पढ़ना चाहती थीं।
EWS स्कॉलरशिप के तहत PGDM कर रही थीं, लेकिन उन्हें जो मिला वो था:
- शारीरिक शोषण
- मानसिक प्रताड़ना
- डर और चुप्पी की ज़ंजीर
FIR से फरार तक: आरोपी की चालाकी
4 अगस्त: संस्थान के एडमिन ने चैतन्यानंद के खिलाफ FIR दर्ज करवाई
9 अगस्त: उसे पद से हटाया गया
अब तक फरार है
आखिरी लोकेशन: आगरा
पुलिस को मिली इंस्टीट्यूट के बेसमेंट में छुपी एक वॉल्वो कार, जिस पर लिखा था –
“39 UN 1”
यह फर्जी यूनाइटेड नेशन नंबर प्लेट थी — ताकि वह खुद को राजनयिक दिखा सके।
पुलिस ने कार जब्त कर ली है।
श्रृंगेरी मठ ने भी झाड़ा पल्ला
यह संस्थान दक्षिणाम्नाय श्री शारदा पीठ, श्रृंगेरी (कर्नाटक) की शाखा है।
मठ ने बयान जारी कर कहा:
“स्वामी चैतन्यानंद का आचरण हमारी नीतियों के खिलाफ है। अब उससे कोई संबंध नहीं।”
अब सवाल ये हैं…
- 17 नहीं, कितनी और छात्राएं होंगी जो आज भी चुप हैं?
- जो फैकल्टी इस शोषण में शामिल थीं, उनपर कार्रवाई कब होगी?
- क्या इंस्टीट्यूट को भी कटघरे में नहीं खड़ा किया जाना चाहिए?
- क्या देश की बेटियों की सुरक्षा सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई है?
अब क्या ज़रूरी है?
स्वामी चैतन्यानंद की तत्काल गिरफ्तारी
इंस्टीट्यूट में स्वतंत्र और पारदर्शी जांच
छात्राओं को काउंसलिंग, सुरक्षा और न्याय
संस्थान पर निगरानी और जवाबदेही तय करना
ये सिर्फ एक केस नहीं, एक सिस्टम का आइना है
जिस देश में ‘गुरु’ को भगवान का दर्जा दिया जाता है, वहां अगर वही गुरु ‘भक्षक’ बन जाए, तो शिक्षा नहीं, पूरा समाज शर्मसार होता है।
ये कहानी दिल्ली की है, लेकिन सवाल पूरे देश का है — कब तक बेटियां शोषित होंगी, और हम चुप रहेंगे?



