ड्राइवर और बस मालिक गिरफ्तार, जोधपुर में शव लेने से इंकार, परिजनों का धरना जारी
सरकार का मुआवजा ऐलान: एक परिवार में 3 मौतें तो 25 लाख, घायलों को 2-2 लाख की मदद
जोधपुर-जैसलमेर | राजस्थान के जैसलमेर से जोधपुर जा रही एक प्राइवेट एसी स्लीपर बस में लगी भीषण आग ने 22 लोगों की जान ले ली। इस हादसे ने न सिर्फ 22 परिवारों की खुशियों को राख कर दिया, बल्कि राज्य की परिवहन व्यवस्था, सुरक्षा मानकों और प्रशासनिक सतर्कता पर गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं।
14 अक्टूबर, दोपहर 3:30 बजे — वो मनहूस घड़ी
ये वही दिन था जब दर्जनों लोग अपने गंतव्य की ओर रवाना हुए थे। कोई शादी में जा रहा था, कोई इलाज के लिए, तो कोई नौकरी की तलाश में। मगर उन्हें क्या पता था कि यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा।
जैसलमेर से जोधपुर जा रही एक प्राइवेट एसी स्लीपर बस में अचानक आग लग गई।
- बस में कुल 60 से अधिक यात्री सवार थे
- आग इतनी भीषण थी कि 19 लोग मौके पर ही जलकर राख हो गए
- एक व्यक्ति की रास्ते में मौत हुई
- दो ने इलाज के दौरान दम तोड़ा
अब तक 22 लोगों की मौत हो चुकी है।
शवों की हालत देख डॉक्टर भी स्तब्ध, DNA टेस्ट के बाद ही मिलेंगे शव
जोधपुर के महात्मा गांधी हॉस्पिटल में शवों का पोस्टमॉर्टम और DNA टेस्ट जारी है। कई शव इस कदर जल चुके हैं कि उनकी पहचान कर पाना संभव नहीं।
डॉक्टर्स का कहना है:
“हमने बहुत कुछ देखा है, लेकिन इस बार शवों की स्थिति देखकर मन कांप गया। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक — कोई नहीं बचा।”
परिजनों का गुस्सा फूटा, शव लेने से किया इंकार, धरने पर बैठे
दर्द की पराकाष्ठा तब देखने को मिली जब पीड़ित परिजन शव लेने से इनकार कर धरने पर बैठ गए।
उनकी एक ही मांग है —
- उचित मुआवजा
- दोषियों की गिरफ्तारी
- सिस्टम में सुधार
एक पीड़ित महिला ने कहा:
“मुझे सिर्फ पैसे नहीं, इंसाफ चाहिए। मेरे पति और दो बच्चे गए हैं… मैं अब किसके सहारे जियूं?”
कड़ी कार्रवाई: बस मालिक तुराब अली और ड्राइवर शौकत गिरफ्तार
घटना के दो दिन बाद पुलिस हरकत में आई और बुधवार रात बस के मालिक तुराब अली और ड्राइवर शौकत को गिरफ्तार कर लिया।
- SP अभिषेक शिवहरे के मुताबिक, मामले में 2 एफआईआर दर्ज की गई हैं।
- आरोप है कि बस में फायर सेफ्टी सिस्टम नदारद था, और ओवरलोड वायरिंग से शॉर्ट सर्किट हुआ।
इस आधार पर पुलिस ने गैर इरादतन हत्या और आपराधिक लापरवाही की धाराओं में केस दर्ज किया है।
सरकारी सहायता का ऐलान: कौन कितना मुआवजा पाएगा?
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राहत राशि की घोषणा की है:
| स्थिति | आर्थिक सहायता |
|---|---|
| एक ही परिवार में 3 या अधिक मौतें | ₹25 लाख |
| एक या दो मौतें | ₹10 लाख प्रति व्यक्ति |
| गंभीर घायल | ₹2 लाख |
| सामान्य घायल | ₹1 लाख |
सरकार ने घायलों के फ्री इलाज की व्यवस्था का भी आश्वासन दिया है।
5 मरीज वेंटिलेटर पर, 8 अन्य गंभीर
जोधपुर के महात्मा गांधी हॉस्पिटल में:
- 5 मरीज वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं
- 8 घायलों को ICU में रखा गया है
- डॉक्टरों की एक विशेष टीम लगातार निगरानी कर रही है
सबसे बड़ा सवाल: जिम्मेदार कौन?
- बस को फिटनेस सर्टिफिकेट कैसे मिला?
- क्या ड्राइवर और स्टाफ को आपात स्थिति से निपटने की ट्रेनिंग थी?
- फायर फाइटिंग इक्विपमेंट क्यों नहीं था?
- घटना के बाद रेस्क्यू में देरी क्यों हुई?
इन सवालों का जवाब प्रशासन को देना होगा।
लोगों की मांग: सिर्फ मुआवजा नहीं, सुधार जरूरी
इस हादसे के बाद पूरे राज्य में रोष फैल गया है। लोग मांग कर रहे हैं कि:
- हर प्राइवेट बस में फायर अलार्म और सेफ्टी इक्विपमेंट अनिवार्य किए जाएं
- ड्राइवर-कंडक्टर की ट्रेनिंग अनिवार्य हो
- सख्त जांच के बिना बसों को परमिट न दिया जाए
- दोषियों को कठोर सजा मिले



