जैसलमेर : राजस्थान के जैसलमेर से जोधपुर जा रही एक निजी बस में मंगलवार दोपहर एक भयंकर अग्निकांड में 21 यात्रियों की दर्दनाक मौत हो गई और 16 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। केके ट्रैवल्स की यह बस, जिसमें 57 यात्री सवार थे, जैसलमेर-जोधपुर राजमार्ग पर अचानक धुएं के साथ आग की लपटों में घिर गई। बस में सवार यात्रियों के लिए यह सफर एक जानलेवा हादसे में तब्दील हो गया।
बस के पिछले हिस्से से अचानक निकले धुएं को देखकर चालक ने तुरंत वाहन सड़क किनारे रोका, लेकिन कुछ ही पलों में आग की भयानक लपटों ने पूरे वाहन को अपनी चपेट में ले लिया। यात्रियों ने जान बचाने के लिए संघर्ष किया, लेकिन तेज़ी से फैली आग ने कई लोगों को जिंदा जलाकर राख कर दिया।
स्थानीय लोग और प्रशासन ने किया बचाव कार्य
स्थानीय लोग और राहगीर मौके पर तत्काल पहुंचे और आग बुझाने की कोशिश की। दमकल विभाग और पुलिस ने भी त्वरित कार्रवाई की और घायलों को निकटतम अस्पतालों में भर्ती कराया। प्रारंभिक इलाज के बाद 16 गंभीर रूप से घायल यात्रियों को जोधपुर के उन्नत चिकित्सा केंद्रों में स्थानांतरित किया गया, लेकिन वहां इलाज के दौरान एक घायली यात्री की मौत हो गई।
हादसे का संभावित कारण: शॉर्ट सर्किट
पुलिस और फायर ब्रिगेड की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आग लगने का कारण बस में हुए शॉर्ट सर्किट हो सकता है। यह बस हाल ही में एसी बस से स्लीपर कोच में परिवर्तित की गई थी, जिससे इसकी सुरक्षा व्यवस्था और इमरजेंसी प्रोटोकॉल पर सवाल उठने लगे हैं।
प्रधानमंत्री ने जताया गहरा दुःख, मृतकों के परिजनों को सहायता की घोषणा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दुःखद घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया और मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये, तथा घायलों को 50,000 रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। प्रधानमंत्री ने कहा, “इस दुखद हादसे में जान गंवाने वालों के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं। मैं घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना करता हूं।”
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने किया घटनास्थल का दौरा
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी तुरंत जैसलमेर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने मृतकों के परिवारों को हर संभव सहायता का भरोसा दिया। इस हादसे की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने अपना चुनाव प्रचार कार्यक्रम रद्द कर दिया। राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौर समेत कई राजनीतिक नेताओं ने भी संवेदना व्यक्त की।
सुरक्षा मानकों पर सवाल, प्रशासन ने लिया संज्ञान
यह हादसा निजी परिवहन सेवाओं में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की चिंता बढ़ाता है। स्लीपर बसों में अग्नि सुरक्षा उपकरणों की कमी और तकनीकी खराबी से यात्रियों की जान जोखिम में पड़ती है। जिला प्रशासन ने मृतकों के परिजनों के लिए राहत कार्य तुरंत शुरू कर दिया है और सभी घायलों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। हेल्पलाइन नंबर जारी कर परिवारों को सहायता देने का भी प्रबंध किया गया है।
सावधानी ही बचा सकती है ज़िंदगी
यह भयंकर अग्निकांड एक करारा सबक है कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए नियमों का सख्ती से पालन और नियमित जांच अत्यंत आवश्यक है। निजी बस ऑपरेटरों की जिम्मेदारी बनती है कि वे अपने वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दें ताकि इस तरह की दुर्घटनाएं भविष्य में न हों।



