Thursday, March 5, 2026
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जेपी इंफ्राटेक के खिलाफ ईडी की बड़ी कार्रवाई

12,000 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग केस में एमडी मनोज गौर गिरफ्तार
नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रियल एस्टेट क्षेत्र में धोखाधड़ी के एक बड़े मामले में जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर (एमडी) मनोज गौर को गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई कथित रूप से 12,000 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग और घर खरीदारों के साथ धोखाधड़ी से जुड़ी है। जेपी ग्रुप पर ईडी का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है, और यह गिरफ्तारी जांच की एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकती है।
क्या है मामला?
ईडी की जांच के अनुसार, जेपी इंफ्राटेक और जेपी एसोसिएट्स लिमिटेड जैसी कंपनियों ने हजारों घर खरीदारों और निवेशकों से करोड़ों रुपये वसूल किए, लेकिन उन्हें फ्लैट या संपत्ति सौंपने के बजाय इन फंड्स को अन्य प्रोजेक्ट्स में डायवर्ट कर दिया। इससे प्रभावित खरीदारों को वर्षों से पजेशन का इंतजार है, जबकि उनकी मेहनत की कमाई पर पानी फिर गया।
अन्य कंपनियां भी फंसीं
इस घोटाले में जेपी ग्रुप के अलावा गौरसंस , गुलशन , महागुन और सुरक्षा रियल्टी जैसी प्रमुख रियल एस्टेट कंपनियां भी नामजद हैं। ईडी का आरोप है कि इन कंपनियों के बीच फंड ट्रांसफर और सिफनिंग के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग की गई। जेपी इंफ्राटेक को 2024 में सुरक्षा रियल्टी ग्रुप ने अधिग्रहित किया था, लेकिन जांच अभी भी जारी है।
हालिया छापेमारी का कनेक्शन
गिरफ्तारी से पहले ईडी ने दिल्ली-एनसीआर (नोएडा, गाजियाबाद सहित) और मुंबई के कुल 12-15 स्थानों पर छापेमारी की थी। इनमें जेपी बिल्डर्स का नोएडा सेक्टर-128 स्थित मार्केटिंग ऑफिस भी शामिल था। छापों में दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन के सबूत बरामद किए गए। यह ऑपरेशन प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत चल रही जांच का हिस्सा था।
जेपी ग्रुप का बैकग्राउंड
जेपी इंफ्राटेक पर 2017 से कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस चल रहा है, जो आईडीबीआई बैंक की अगुवाई वाले कंसोर्टियम की शिकायत पर शुरू हुआ था। कंपनी ने यमुना एक्सप्रेसवे के आसपास कई हाउसिंग प्रोजेक्ट्स लॉन्च किए थे, लेकिन फंड की कमी और डायवर्जन के कारण हजारों यूनिट्स डिलीवर नहीं हो सके। ईडी की यह कार्रवाई घर खरीदारों के लिए राहत की उम्मीद जगाती है, जो वर्षों से न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं।
ईडी के एक अधिकारी ने बताया कि मनोज गौर को 14 दिनों की रिमांड पर लिया जा सकता है, और पूछताछ में और खुलासे होने की संभावना है। रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता लाने के लिए सरकार की सख्ती बढ़ रही है, और यह मामला उद्योग के लिए चेतावनी का संदेश है। अधिक अपडेट के लिए बने रहें।

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