Friday, March 6, 2026
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ग्रेटर नोएडा में कंपनी के साथ 7 करोड़ की धोखाधड़ी:मामला रक्षा मसौदे से जुड़ा है, हथियार की तकनीक को अपना बताकर कंपनी ने भ्रमित किया

नोएडा : ग्रेटर नोएडा की एमट्रेक्स टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड ने मेसर्स क्विक पे प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशकों पर 7 करोड़ की धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया है। ये मुकदमा रक्षा मसौदा से जुड़ा धोखाधड़ी कर हथियार बनाने की तकनीकी से संबंधित है।

बीटा-2 कोतवाली पुलिस ने आरोपी कंपनी के निदेशक राजीव रॉय, मनोशी रॉय एवं राकेश कुमार के खिलाफ केस दर्ज किया है। साइट-4 स्थित एमट्रेक्स टेक्नोलॉजी के निदेशक असीम यादव का कहना है कि उनकी कंपनी रक्षा उपकरणों की तकनीक पर काम करती है। उसके पास रक्षा औद्योगिक लाइसेंस (डीआईएल) है।

17 फरवरी 2025 को भारतीय सेना के इन्फैंट्री महानिदेशालय (इन्फ-7) ने 190 वीटीओएल लोइटर म्यूनिशन सिस्टम की खरीद के लिए प्रस्ताव जारी किया था। इसके बाद क्विक पे प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधि मई-2025 में एमट्रेक्स टेक्नोलॉजीज के ग्रेटर नोएडा स्थित संयंत्र पर पहुंचे और साझेदारी का प्रस्ताव रखा।

ऑर्डर देने का वायदा किया, लेकिन खरीदे नहीं

क्विक पे कंपनी के पास रक्षा तकनीकी से जुड़ी कोई योग्यता नहीं है। बावजूद झूठे वादे कर उन्होंने एमट्रेक्स से हथियार की डिजाइन, इंजीनियरिंग, सॉफ्टवेयर और प्रोटोटाइप हथियारयुक्त ड्रोन की तकनीकी और विशेषज्ञता हासिल कर ली। क्विक पे ने 10 मई 2025 को एक क्रय आदेश जारी कर 40 लाख 36 हजार 780 रुपए की खरीद का भरोसा दिलाया था, लेकिन आज तक कोई क्रय नहीं किया गया।

परियोजना के लिए सात करोड़ का निवेश

एमट्रेक्स का दावा है कि उसने हथियारों के अनुसंधान, प्रोटोटाइप विकास, क्षेत्रीय परीक्षण, हथियारों की खरीद और अन्य संसाधनों पर कंपनी ने लगभग 7 करोड़ रुपए खर्च किए जो अब तक बकाया हैं। कई विक्रेताओं को भी भुगतान नहीं हो पाया है। आरोपियों को सौंपे गए प्रोटोटाइप और डिजाइन में मॉडर्न एवं गोपनीय तकनीक का इस्तेमाल हुआ था।

झूठे दस्तावेज दिखाकर किया भ्रमित

​​​​​​आरोपियों ने झूठे दस्तावेज और फर्जी लाइसेंस दिखाकर रक्षा मंत्रालय को भ्रमित किया और सेना के सामने एमट्रेक्स द्वारा बनाए गए मॉडर्न ड्रोन को अपनी तकनीक बताकर प्रस्तुत किया। असीम यादव का कहना है कि अगर क्विक पे कंपनी एग्रीमेंट पूरा करने की कोशिश करती है तो वह घटिया गुणवत्ता वाले पुर्जे लगाएगी या फिर अवैध रूप से विदेश से प्रतिबंधित तकनीक का आयात करेगी।

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