जेल के भीतर पूर्व मंत्री पर हमला, सिर फटा, ट्रॉमा सेंटर में भर्ती
लखनऊ | उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली जिला जेल में मंगलवार की शाम कुछ ऐसा हुआ, जिसने न सिर्फ कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए, बल्कि सत्ता, सुरक्षा और साजिश के बीच की रेखा को धुंधला कर दिया।
सपा के पूर्व खनन मंत्री गायत्री प्रजापति, जो गैंगरेप केस में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं, पर लोहे की पटरी से जानलेवा हमला किया गया।
घटना जेल के अस्पताल की है। सिर पर गहरा घाव, हाथ में चोट, और 5 टांके लग चुके हैं।
क्या हुआ उस शाम? जेल में बढ़ते तनाव की कहानी
शाम करीब 5 बजे जेल अस्पताल में एक बंदी सफाई कर रहा था। उसी समय वहां भर्ती गायत्री प्रजापति से उसका विवाद हो गया।
सूत्र बताते हैं:
- गायत्री ने बंदी को कथित रूप से गालियां दीं।
- जवाब में बंदी ने पास रखी अलमारी की स्लाइडिंग पटरी उठाई और सीधे सिर पर वार कर दिया।
- शुरुआत में ‘कैंची से हमला’ की अफवाह चली, लेकिन जेल प्रशासन ने इसे गलत बताया।
KGMU का ट्रॉमा सेंटर: भावुक दृश्य, सियासी दबाव
घायल गायत्री को तुरंत KGMU ट्रॉमा सेंटर लाया गया।
यहां का दृश्य बेहद भावुक था — पत्नी महाराजी देवी, जो खुद अमेठी की विधायक हैं, रोती हुई बेटी के साथ पहुंचीं।
“ये हमला सिर्फ मेरे पति पर नहीं, पूरे सिस्टम पर है।” — महाराजी देवी
हमलावर हिरासत में, जांच जारी
जेल प्रशासन ने हमलावर बंदी को तुरंत हिरासत में ले लिया है। पूछताछ जारी है कि:
- यह हमला आकस्मिक था या योजनाबद्ध?
- क्या किसी ने इस हमले के लिए इशारा किया?
सियासी भूचाल: अखिलेश यादव बोले — ‘जेल में भी कोई सुरक्षित नहीं’
समाजवादी पार्टी ने योगी सरकार को घेरा।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने ट्वीट किया:
“जब एक पूर्व मंत्री जेल में सुरक्षित नहीं, तो आम आदमी की क्या सुरक्षा होगी?
न्यायिक जांच होनी चाहिए।”
वहीं पार्टी प्रवक्ता फखरुल हसन चांद बोले:
“पूर्व मंत्री पर जेल में हमला चिंताजनक है। सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि उनकी सुरक्षा और इलाज में कोई कमी न रहे।”
गायत्री प्रजापति: पेंटर से मंत्री, फिर गैंगरेप केस में कैदी
| चरण | विवरण |
|---|---|
| शुरुआत | अमेठी के एक छोटे से गांव से निकले गायत्री, पहले पुताई का काम करते थे। |
| बड़ा मौका | राजीव गांधी द्वारा HAL प्रोजेक्ट के तहत उन्हें बड़ा पेंटिंग का ठेका मिला। |
| राजनीतिक एंट्री | 2012 में सपा से विधायक, फिर 2013 में मंत्री बने। |
| विवादों का दौर | मंत्री बनने के बाद खनन घोटालों में नाम आया, करोड़ों की बेनामी संपत्तियों के आरोप लगे। |
| गिरफ्तारी और सजा | 2017 में नाबालिग से गैंगरेप का मामला दर्ज हुआ। 2021 में उम्रकैद की सजा सुनाई गई। |
पत्नी ने संभाली राजनीतिक विरासत
- 2022 में महाराजी देवी ने अमेठी से चुनाव लड़ा।
- बीजेपी के संजय सिंह को हराया।
- अब एक बार फिर सियासी रूप से सक्रिय, और इस हमले को सरकार की नाकामी बता रही हैं।
बड़ा सवाल: जेल की सुरक्षा या राजनीतिक प्रतिशोध?
इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं:
- एक VIP कैदी तक हमला करने वाला बंदी कैसे पहुंचा?
- क्या जेल में अंदरूनी रंजिश या गैंग का दखल है?
- क्या हमले के पीछे कोई राजनीतिक साजिश है?
पुलिस और प्रशासन फिलहाल जवाब ढूंढ़ने में लगे हैं, लेकिन सियासत ने इसे मुद्दा बना लिया है।
सियासत की चकाचौंध से जेल की काल कोठरी तक
गायत्री प्रजापति की कहानी महज एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि एक ऐसे सिस्टम की है जहां सत्ता, धन और अपराध के बीच की रेखाएं अक्सर धुंधली हो जाती हैं।
अब जब वह जेल की सलाखों के पीछे हैं, तब भी उनके नाम पर सियासत जिंदा है — और शायद कहीं न कहीं खतरा भी।



