Saturday, March 7, 2026
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गहलोत बोले- विपक्ष की बात नहीं मानोगे तो तकलीफ पाओगे:बिहार में निष्पक्ष चुनाव कैसे होंगे, चुनाव आयोग ने एकतरफा फैसला किया

जयपुर: पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने चुनाव आयोग और देश की जांच एजेंसियों पर दबाव में काम करने का आरोप लगाते हुए सवाल उठाए हैं। गहलोत ने बिहार में निष्पक्ष चुनाव होने पर भी संदेह जताया। गहलोत ने मीडिया से बातचीत में कहा कि देश में लोकतंत्र कमजोर हो रहा है। सरकार ने सब एजेंसियों को दबाव में ले लिया है। जो आज सत्ता में हैं, प्रधानमंत्री हों या इनके नेता हों। उन्हें सोचना चाहिए कि सत्ता पक्ष तभी होता है, जब विपक्ष होता है। विपक्ष की बात नहीं मानोगे नहीं सुनोगे तो देश भी तकलीफ पाएगा। आप भी तकलीफ पाओगे। गहलोत जयपुर में मीडिया से बातचीत कर रहे थे।

गहलोत ने कहा- चुनाव आयोग ने बिहार में एक नया शिगूफा छोड़ दिया, मैं खुद पटना जा कर आया हूं। इसका परसों वहां बहुत भारी रिएक्शन है। मेरे ड्राइवर कह रहे थे साहब कि आप बताइए मेरे से मां बाप से डेट ऑफ बर्थ सर्टिफिकेट मांग रहे हैं। मैं कहां से लेकर आऊंगा? इनकी प्रोसेस से लाखों लोग वंचित रह सकते हैं। ये स्थिति बन गई है। कैसे डेमोक्रेसी रहेगी। बिहार में चुनाव निष्पक्ष कैसे होंगे बता दीजिए। चुनाव आयोग किसके कहने से यह सब लेकर आया।

ज्युडिशियरी, चुनाव आयोग दबाव में हो वहां किस लोकतंत्र की बात कर रहे

गहलोत ने कहा- आप सोच सकते हो कि देश कहा जा रहा है, सब दबाव में काम कर रहे हैं। इनकम टैक्स, ईडी, सीबीआई ये तीनों संस्थाएं दबाव में हैं। ईडी, इनकम टैक्स, सीबीआई, इनकी जो भूमिका है, वो देशहित में है। लेकिन जो दबाव में इनको लिया गया है। इससे विपक्षी पार्टियों के नेताओं के साथ अन्याय हो रहा है। वो जगजाहिर है।

गहलोत ने कहा- संसद में जवाब आया है। 193 केसेज इन्होंने किए हैं। केवल दो प्रूव कर पाए हैं। मतलब एक प्रतिशत। कितना तंग किया होगा लोगों को। उनके परिवार वालों पर क्या बीती होगी? जिस मुल्क में ये स्थिति चल रही हो, दबाव में ज्युडिशियरी, इलेक्शन कमीशन और ब्यूरोक्रेसी हो। कैसे डेमोक्रेसी की बात वो करते हैं? डेमोक्रेसी कमजोर होती जा रही है। ये हित में नहीं है। सोचने वाली बात है।

कांग्रेस नेताओं के साथ चुनाव आयोग का व्यवहार निंदनीय

गहलोत ने कहा- मैं लंबे अरसे से कह रहा हूं कि देश किस दिशा में जा रहा है, किस दिशा में जाएगा, उसका नमूना ये है।

हमने भी कई ऐसी बातें कहीं होंगी। उससे हो सकता है ईसीआई प्रमुख को या मेंबर को अच्छा नहीं लगा होगा। तब भी उनका व्यवहार बड़ा शालीनता से होता था। यह उनकी ड्यूटी भी है कि कोई नागरिक है, देश का मतदाता कोई भी है, किसी दल का नेता है। उसको धैर्य से सुनें और निष्पक्ष फैसला करें।

राहुल गांधी के सवालों को जवाब नहीं दिया, उन्हें आर्टिकल लिखना पड़ा

गहलोत ने कहा- बहुत बड़ी ड्यूटी है, इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया किसे कहते हैं, जिसके ऊपर पूरा चुनाव डिपेंड करता है। बहुत बड़ी संस्था है। बहुत क्रेडिबल संस्था है। उसके बारे में जो कल परसों से सुन रहे हैं। जो व्यवहार किया गया है, वो बहुत ही अशोभनीय है। इसकी किन शब्दों में आलोचना करूं मेरी समझ नहीं आ रहा है।

गहलोत ने कहा- पहले भी राहुल गांधी ने महाराष्ट्र को लेकर कई सवाल उठाए थे। उसका भी ये लोग प्रॉपर जवाब नहीं दे पाए। उनको आर्टिकल लिखना पड़ा, उसका कोई जवाब नहीं तो ये व्यवहार इलेक्शन कमीशन के पार्ट पर किसी भी ढंग से उचित नहीं कहा जा सकता। मेरे ख्याल से इसका रिएक्शन पूरे देश के अंदर है और बहुत भयंकर रिएक्शन है।

भजनलाल सरकार के जुमले पर आरएसएस, बीजेपी नेता हंस रहे

पांच साल बनाम डेढ़ साल के सीएम भजनलाल के बयान पर गहलोत ने कहा कि ये तो बीजेपी वाले खुद ही हंस रहे होंगे। उनका पांच साल बनाम डेढ़ साल का जुमला है, उस पर मैं समझता हूं आरएसएस वाले और बीजेपी के इंटेलेक्चुअल लोग हैं , जो राजनीति को समझते हैं, वे ह सब मन में हंस रहे होंगे कि बोल क्या रहे हैं? मेरा यह मानना है, वे खुद हंस रहे होंगे मैं क्या कमेंट करूं? मैं तो कमेंट कर चुका हूं कि यह बात कह कर बहुत बड़ा साहस दिखाया है, हिम्मत की बात है कि पांच साल बनाम डेढ़ साल, वह भी भजनलाल सरकार के इससे बड़ी बात क्या हो सकती है?

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