नोएडा : नोएडा में निकलने वाले वेस्ट से एक साथ तीन प्रोडेक्ट बनेंगे। पहला बायोगैस से बिजली , दूसरा कंपोस्ट और तीसरा पानी। इस पानी का प्रयोग कार वाशिंग, कंस्ट्रक्शन और सिचाई के लिए किया जाएगा। इस इंटीग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट कहते है। अभी ये प्लांट गोवा में रन कर रहा है। वहां इससे पानी, बिजली और कंपोस्ट तीनों बनाए जा रहे है। इसी टेक्नोलॉजी का प्रयोग करके नोएडा में 300 टीडीपी का प्लांट लगाया जाएगा।
गोवा में प्लांट का दौरा करने गए अधिकारियों ने इसकी पीपीटी तैयार की है। जिसका प्रजेंटेशन किया जाएगा। गोवा के इस प्लांट में कचरे से जैविक पदार्थों को अलग किया जाता है और उन्हें बायोगैस के रूप में परिवर्तित किया जाता है। जो विद्युत ऊर्जा उत्पादन में सहायक होता है। रेस्टोरेंट्स से निकलने वाले गीले कचरे को महत्वपूर्ण बायो-प्रोडक्ट्स मीथेन युक्त जैसे बायो-गैस में बदला जाता है।
साथ ही सूखे कचरे से रीसाइकल करने योग्य सामग्री मिलती है। गोवा के इस इस प्लांट में 250 मैट्रिक टन कचरे का इसी तरह निपटारा किया जाता है। इससे पानी भी निकलता है। इसके अलावा प्लांट प्रतिदिन 7-8 टन खाद भी उत्पन्न करता है।
कूड़े से मिलेगा साफ पानी
गीले सूखे कचरे को इस टेक्नोलॉजी से निपटारा करने से हमे लिचेड (एक प्रकार का गंदा पानी) मिलता है। इस पानी को शोधित कर प्रयोग में लाया जा सकता है। प्राधिकरण इस पानी का प्रयोग करेगा। इसके लिए इंटीग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के साथ ही एक एसटीपी भी बनाया जाएगा। ये लिचेड एसटीपी में शोधित होगा। एक आकलन के अनुसार 100 टन कचरे से रोजाना करीब 2 टन पानी बनाया जा सकता है। जिसका प्रयोग कार वाशिंग , सिचाई और कंस्ट्रक्शन में हो सकता है।
पीपीपी मॉडल में लगाएंगे प्लांट
नोएडा के अस्तौली में इस प्लांट को पीपीपी मॉडल पर लगाया जाएगा। यानी कंपनी बिजली , कंपोस्ट और पानी को बेचकर प्लांट का खर्चा निकालेगी। इस प्लांट को चलाएगी। साथ ही एग्रीमेंट के तहत प्राधिकरण को हैंडओवर करेगी। इसकी क्षमता 300 से 400 टन कीर होगी। इसके लिए जल्द ही आरएफपी जारी की जाएगी।
नोएडा में 1200 टन रोज निकलता कचरा
नोएडा में रोजाना करीब 1200 टन वेस्ट निकलता है। जिसका निपटारा वैज्ञानिक पद्यति से सेक्टर-145 में किया जा रहा है। यहां एक्सट्रा और रोजाना निकलने वाले कचरे के निपटारे के लिए कंपनी का चयन भी जल्द किया जाएगा। जोकि 5 लाख टन कचरे का निपटारा करेगी।



