रेरा नहीं, नक्शा नहीं, जमीन नहीं – फिर भी फ्लैटों की धड़ल्ले से बुकिंग, और सरकार खामोश!
विशेष भंडाफोड़ रिपोर्ट संवाददाता
जितेन्द्र चौधरी
ग्रेटर नोएडा। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में एस्कॉन इन्फ्रा रियल्टर प्राइवेट लिमिटेड नामक रियल एस्टेट कंपनी ने भ्रष्ट सिस्टम की छत्रछाया में कानून, प्रशासन और जनता – तीनों के साथ क्रूर मज़ाक किया है।
रेरा रजिस्ट्रेशन नहीं, ज़मीन का स्वामित्व नहीं, नक्शा पास नहीं – इसके बावजूद कंपनी फेसबुक, इंस्टाग्राम, गूगल विज्ञापनों के ज़रिए लाखों लोगों को ‘सपनों के घर’ बेच रही है।
कहां-कहां फैला फर्जीवाड़ा?
• सेक्टर 150, नोएडा
• सूरजपुर साइट-सी
• यमुना एक्सप्रेसवे
• और अब संभावित विस्तार ग्रेटर नोएडा सेक्टर-36 तक!
‘फ्लैट नहीं, धोखा बिक रहा है’ – एस्कॉन की असली सच्चाई
- कोई रेरा रजिस्ट्रेशन नहीं
- नो अथॉरिटी अप्रूवल
- जमीन एस्कॉन के नाम नहीं
- कोई नक्शा स्वीकृत नहीं
- कब्जा संदिग्ध और विवादित
फिर भी जनता को बेच रहे हैं
11,000 में बुकिंग चालू, ड्रीम होम ऑफर, इन्वेस्टमेंट का सुनहरा मौका! ऑनलाइन फ्रॉड का नया मॉडल – इंस्टाग्राू लाईव से लेकर ईएमआई तक का जाल!
एस्कॉन इन्फ्रा सोशल मीडिया पर अपनी ब्रांडिंग को ‘रियल’ दिखाने के लिए हर दिन रील्स, सशुल्क विज्ञापन और इन्फ्लुएंसर कोलैबोरेशन का इस्तेमाल कर रहा है।
इंस्टाग्राम और फेसबुक पर हर घंटे नया प्रचार – जनता को दिखाया जा रहा है सपनों का महल, जबकि कागज़ों में सब शून्य है। - एनबीएफसी और बैंक भी खेल में शामिल?
ठीक शाहबेरी स्कैम की तर्ज पर एस्कॉन इन्फ्रा को कुछ एनबीएफसी और बैंक लोन मुहैया करा रहे हैं —
ईएमआई लेकर जनता को फंसाने का वैसा ही प्लान, जहां घर का वादा तो मिलता है, लेकिन कब्जा नहीं – सिर्फ कोर्ट केस। - रेरा, जीएनआईडीए और सिस्टम की चुप्पी – सबसे बड़ा सवाल!
- जब कोई प्रोजेक्ट रेरा पोर्टल पर नहीं है, तो एनबीएफसी लोन कैसे दे रहे हैं?
- जीएनआईडीए और अथॉरिटी को इन साइट्स की जानकारी नहीं है क्या?
- डिजिटल प्लेटफॉर्म्स फर्जी विज्ञापन कैसे चला रहे हैं?
क्या यह ‘ऊपर तक सेटिंग’ की क्लासिक केस स्टडी नहीं है?
अब सवाल बिल्डर पर नहीं — सरकार पर है!
2016 में रेरा कानून बना था ताकि जनता को बचाया जा सके। लेकिन 2025 में एस्कॉन इन्फ्रा जैसा बिल्डर बिना किसी डर, बिना किसी वैधता के, अरबों का स्कैम चला रहा है।
क्या यह दर्शाता है कि उत्तर प्रदेश में कानून सिर्फ कमजोर और ईमानदारों पर चलता है?
जनता के लिए चेतावनी
‘बुकिंग रसीद’ कानूनी गारंटी नहीं है
बैंक लोन का मतलब प्रोजेक्ट वैध नहीं है
ईएमआई की शुरुआत, अदालत की तारीख़ की गारंटी हो सकती है
‘कागज़ दिखाओ, तभी बुकिंग कराओ!’
जनहित में उठीं 6 ज़रूरी माँगें
1 एस्कॉन इन्फ्रा की सभी साइट्स पर संयुक्त जांच हो
2 फेसबुक, इंस्टाग्राम और गुगल को नोटिस भेजा जाए
3 एनबीएफसी और बैंकों पर नियामक कार्यवाही हो
4 एस्कॉन इन्फ्रा और निदेशकों पर एफआईआर दर्ज हो
5 फर्जी विज्ञापन चलाने वालों पर आईटी एक्ट के तहत कार्यवाही हो
6 भविष्य में बिना रेरा रजिस्ट्रेशन प्रोजेक्ट्स का डिजिटल बैन हो
एस्कॉन इन्फ्रा से प्रतिक्रिया के लिए संपर्क किया गया, लेकिन कंपनी ने कोई जवाब नहीं दिया।
अगर आज एस्कॉन इन्फ्रा पर कार्रवाई नहीं हुई —
तो कल हर गली में एक नया एस्कॉन मिलेगा।



