सरकार का दावा—वायु गुणवत्ता में सुधार; विपक्ष बोला—‘बारिश के नाम पर धोखा’।
आईआईटी कानपुर के साथ हुआ प्रयोग, मगर हवा अब भी जहरीली।
नई दिल्ली : राष्ट्रीय राजधानी की जहरीली हवा से राहत दिलाने के लिए मंगलवार को किया गया बहुप्रचारित क्लाउड सीडिंग (कृत्रिम वर्षा) प्रयोग फिलहाल उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका। सरकार ने दावा किया कि इस वैज्ञानिक प्रयास से कुछ इलाकों में वायु गुणवत्ता में हल्का सुधार हुआ और नोएडा व ग्रेटर नोएडा में मामूली बूंदाबांदी दर्ज की गई, लेकिन दिल्ली के ज्यादातर हिस्सों में आसमान सूखा ही रहा।
आईआईटी कानपुर और दिल्ली सरकार के संयुक्त प्रयास से हुए इस परीक्षण में विमान से सिल्वर आयोडाइड और सोडियम क्लोराइड जैसे रसायनों का छिड़काव किया गया। यह प्रक्रिया आठ झोंकों में पूरी की गई, प्रत्येक झोंक में दो से ढाई किलोग्राम रासायनिक मिश्रण छोड़ा गया। इसका उद्देश्य बादलों में संघनन प्रक्रिया को सक्रिय कर बारिश को प्रेरित करना था।
पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि “कृत्रिम वर्षा के लिए मौसम की अनुकूलता अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। मंगलवार को आर्द्रता केवल 15 से 20 प्रतिशत के बीच थी, जो इस प्रक्रिया के लिए पर्याप्त नहीं मानी जाती। इसके बावजूद परीक्षण से कुछ स्थानों पर पीएम 2.5 और पीएम 10 के स्तर में गिरावट दर्ज की गई।”
सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, मयूर विहार, करोल बाग और बुराड़ी जैसे क्षेत्रों में पीएम 2.5 का स्तर क्रमशः 221, 230 और 229 से घटकर 207, 206 और 203 रह गया, जबकि पीएम 10 के स्तर में भी औसतन 15 प्रतिशत कमी आई।
हालांकि, भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने साफ किया कि दिल्ली में दिनभर बारिश के कोई संकेत दर्ज नहीं किए गए।
दिल्ली में 53 साल बाद यह प्रयोग दोबारा किया गया। पिछली बार 1971–72 के दौरान राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला परिसर के ऊपर ऐसे परीक्षण किए गए थे।
पर्यावरण विशेषज्ञों ने इसे केवल “अल्पकालिक राहत” बताया है। पर्यावरणविद् विमलेंदु झा ने कहा, “कृत्रिम बारिश से प्रदूषण कुछ समय के लिए घट सकता है, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है। इस प्रक्रिया में प्रयुक्त रसायन मिट्टी और जल स्रोतों पर दीर्घकालिक असर डाल सकते हैं। सरकार को जमीनी स्तर पर प्रदूषण के मूल कारणों से निपटना होगा।”
राजनीतिक हलकों में भी इस प्रयोग पर जुबानी जंग छिड़ गई। आप पार्टी ने इसे ‘‘बारिश के नाम पर धोखाधड़ी’’ बताते हुए कहा कि ‘‘इंद्रदेव भी भाजपा से नाराज़ हैं,’’ जबकि भाजपा नेताओं ने इसे “वैज्ञानिक दृष्टि से साहसिक पहल” बताया।
इस बीच, मंगलवार शाम चार बजे दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 294 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है, जबकि सोमवार को यह 301 था। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मौसम की स्थिति अनुकूल रही तो आने वाले दिनों में प्रदूषण में कुछ सुधार देखने को मिल सकता है।



