Friday, March 6, 2026
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इंडिगो की मोनोपॉली कैसे बनी, इसकी जांच होगी

ताकत के गलत इस्तेमाल का आरोप; एविएशन सेक्टर में 65 प्रतिशत हिस्सेदारी, रोजाना 2,200 उड़ानें
नई दिल्ली। एविएशन सेक्टर में इंडिगो एयरलाइन की मोनोपॉली (एकतरफा दबदबा) अब जांच के दायरे में आ गई है। देश में निष्पक्ष कारोबार पर नजर रखने वाली संस्था कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया जांच कर रही है कि क्या देश की सबसे बड़ी एयरलाइन ने मोनोपॉली बनाए रखने के लिए प्रतिस्पर्धा के नियमों का उल्लंघन किया है।
इंडिगो संकट कॉम्पिटिशन एक्ट की धारा 4 का खुला उल्लंघन माना जा रहा है। इसके मुताबिक कोई कंपनी अपनी धाक के बल पर मनमानी कीमत नहीं वसूल सकती और सेवाओं को मनमाने तरीके से संचालित कर कस्टमर्स को ब्लैकमेल नहीं कर सकती।
कॉम्पिटिशन कमीशन अंदरूनी तौर पर इंडिगो की मोनोपॉली वाली स्थिति, खास रूट्स पर दबदबे और गलत इस्तेमाल जैसे कई पहलुओं पर छानबीन कर रहा है। किराया बढ़ाने का मामला अगर साबित होता है तो आयोग जांच का आदेश देगा।
इंडिगो ने संकट की जांच के लिए अंतरराष्ट्रीय एक्सपर्ट नियुक्त किया
डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन की ओर से एविएशन नियमों में बदलाव चलते दिसंबर के पहले हफ्ते में इंडिगो में क्रू मेंबर्स की भारी कमी हो गई थी। इसके कारण 1 से 10 दिसंबर के बीच इंडिगो की 5000 से ज्यादा फ्लाइट कैंसिल हुईं थीं।
इंडिगो ने मामले की आंतरिक जांच को पूरी तरह इंटरनेशनल एक्सपर्ट के हवाले करने का फैसला किया है। सीईओ पीटर एल्बर्स शुक्रवार को ष्ठत्रष्ट्र की समिति के सामने पेश हुए थे। कंपनी ने इससे पहले ही स्वतंत्र जांच का जिम्मा विश्व प्रसिद्ध एविएशन एक्सपर्ट कैप्टन जॉन इल्सन को सौंप दिया।
यह कदम संकेत देता है कि एयरलाइन ऑपरेशनल मॉडल और प्रबंधन प्रक्रियाओं की गहराई से समीक्षा करवाने के दबाव में है। इल्सन चार दशक के दौरान शीर्ष वैश्विक संस्थानों का नेतृत्व कर चुके हैं। नियुक्ति इंडिगो बोर्ड के क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप की सिफारिश पर की गई है।

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