Friday, March 6, 2026
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अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश के बढ़ते कदम

गौतम बुद्ध नगर : किसी भी देश के विकास एवं समृद्धि के लिए उद्योगों का होना जरूरी होता है। देश के विकास में औद्योगीकरण का विशेष योगदान होता है। केन्द्र सरकार के मा० प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने औद्योगीकरण के विकास पर बल देते हुए देश में तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास और उद्योगो की स्थापना के लिए उद्यमियों को कई रियायते दी है। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के कुशल निर्देशन में प्रदेश में उद्योगो की स्थापना के लिए उद्यमियों को समस्त आवश्यक सुविधाये दी जा रही है। उत्तर प्रदेश में निवेश आकर्षण, औद्योगिक एवं अवस्थापना विकास में उल्लेखनीय प्रगति हुई है तथा उत्तर प्रदेश भारत में सबसे पसंदीदा निवेश गंतव्य के रूप में उभरा है। देश में सबसे तेजी से बढ़ती हुई राज्य अर्थव्यवस्थाओं में से एक के रूप में उत्तर प्रदेश में राज्य सरकार द्वारा अवस्थापना सुविधाओं का त्वरित विकास किया गया है, निवेशोन्मुख नीतियां घोषित की गई है तथा कारोबारी माहौल में अभूतपूर्व सुधार किया गया है. जिससे प्रदेश की छवि आर्थिक रूप से पिछडे राज्य से परिवर्तित होकर एक प्रगतिशील राज्य के रूप में स्थापित हुई है।
प्रदेश में कानून-व्यवस्था तथा विद्युत आपूर्ति में अभूतपूर्व सुधार, सक्रिय नीतिगत निरूपण एवं इन्वेस्ट यूपी में निवेश सारथी, निवेश मित्र तथा ऑनलाइन प्रोत्साहन-लाभ प्रबंधन प्रणाली (ओआईएमएस) जैसी डिजिटल सुविधाओं से निवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है. जिससे निवेशकों का विश्वास बढ़ा है तथा राज्य में व्यापार करने के लिए अनुकूल वातावरण सृजित हुआ है।
उत्तर प्रदेश सरकार राज्य को एक मुख्य निवेश केंद्र के रूप में स्थापित करने के अपने मिशन को कार्यान्वित करने हेतु प्रतिबद्ध है। यह भी उल्लेखनीय है कि सुचारू नीति कार्यान्वयन, व्यापार को आसान बनाने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस तथा निवेश आकर्षित करने के लिए सतत् विकास के कार्य के प्रति कटिबद्धता से प्रदेश के समस्त अंचलों में संतुलित निवेश का समग्र प्रवाह एवं नागरिकों के जीवन उन्नयन के लिए दीर्घकालिक मूल्यों एवं व्यवस्थाओं को सुनिश्चित किया गया है।
विश्व-स्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने में उत्तर प्रदेश में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। राज्य में विकसित हो रही वायु, जल, सड़क एवं रेल नेटवर्क की कनेक्टिविटी से राज्य के उद्योगों एवं मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों को अपना माल भारत एवं विदेशों के बाजारों में भेजने के लिए परिवहन के विभिन्न साधनों के बीच निर्वाध रूप से स्विच करने की सुविधा प्रदान की जा रही है।
भारत के जलमार्ग परिवहन के बुनियादी ढांचे के एक महत्वपूर्ण मील के पत्थर के रूप में उत्तर प्रदेश देश की प्रथम अंतर्देशीय जलमार्ग परियोजना का उद्घाटन करने वाला अग्रणी राज्य बन गया है, जो ऐतिहासिक गंगा-भागीरथी-हुगली नदी प्रणाली से संबंधित है। राष्ट्रीय जलमार्ग-1 के रूप में नामित यह परियोजना प्रयागराज से हल्दिया तक विस्तारित है तथा इसमें उत्तर भारत के लिए एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स सुविधा के रूप में उभरने की क्षमता है, जो कोलकाता बंदरगाह तक माल के परिवहन हेतु एक सुलभ मार्ग प्रदान करता है। यह अंतर्देशीय जलमार्ग परिवहन की अपार क्षमता का दोहन करने, कनेक्टिविटी को सुदृढ करने तथा संपूर्ण क्षेत्र में आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक परिवर्तनकारी परियोजना है। राज्य में 26 प्रतिशत महत्वपूर्ण जलग्रहण क्षेत्र को आच्छादित करते हुए, राष्ट्रीय जलमार्ग-1 प्रमुख निर्यात केंद्रों को वाराणसी और प्रयागराज होते हुए हल्दिया बंदरगाह से जोडता है।
वाराणसी में भारत के प्रथम मल्टी-मोडल टर्मिनल के उद्घाटन से कनेक्टिविटी एवं व्यापार दक्षता में और वृद्धि होगी। राज्य में राष्ट्रीय जलमार्ग-1 के अन्य टर्मिनलों में वाराणसी में अस्सी घाट तथा राजघाट सम्मिलित है, जो अंतर्देशीय जलमार्ग परिवहन को सुविधाजनक बनाने में राज्य की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हैं। उत्तर प्रदेश में कुल 425 किलोमीटर के साथ अंतर्देशीय जलमार्ग अवस्थापना सुविधा से लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन तथा इस क्षेत्र में आर्थिक विकास को गति मिलेगी।
क्षेत्रीय परिवहन तथा राज्य के प्रत्येक क्षेत्र तक सुगम आवागमन के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश में हो रहे अनेक अत्यधिक आधुनिक एक्सप्रेसवेज़ के निर्माण व विकास से राज्य की सड़क परिवहन व्यवस्था में अभूतपूर्व परिवर्तन हो रहे हैं। यमुना एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, पूर्वाचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस-वे, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे एवं ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे के संचालन से यातायात के समय में भारी कमी आई है, साथ ही जिन क्षेत्रों से यह एक्सप्रेसवेज गुजरते हैं वहां पर व्यापार के अवसरों में वृद्धि हुई है। आगामी गंगा एक्सप्रेसवे, बलिया लिंक एक्सप्रेसवे एवं चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे इत्यादि के प्रारंभ होने पर राज्य में यातायात और सुगम होगा तथा राज्य के प्रमुख निर्यात केंद्रों तक आवागमन व उत्कृष्ट लॉजिस्टिक्स सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इसके अतिरिक्त, ये एक्सप्रेसवेज़ लखनऊ एवं आगरा जैसे प्रमुख महानगरों से दिल्ली तक यात्रा में लगने वाले समय में कमी लाते हुए यातायात को सुचारू करने एवं क्षेत्रीय विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहे है। इन सभी एक्सप्रेसवेज के लिए बिना किसी विवाद के भूमि उपलब्ध कराने वाला त्वरित भूमि अधिग्रहण मॉडल, राज्य सरकार की पारदर्शी नीतियों का द्योतक है एवं अन्य राज्यों के लिए एक उदाहरण भी है।
उत्तर प्रदेश में राज्य के भीतर एवं देश के अन्य नगरों महानगरों तक निर्वाध हवाई यात्रा की सुविधा उपलब्ध है। प्रयागराज, कानपुर, आगरा, बरेली, हिंडन, अलीगढ़, आजमगढ़, चित्रकूट, मुरादाबाद, श्रावस्ती और गोरखपुर समेत विभिन्न शहरों में स्थित कुल 15 घरेलू हवाई अड्डों के साथ प्रदेशवासियों, देशवासियों तथा पर्यटकों व आगंतुकों के लिए हवाई यात्रा अब बेहद सुलभ हो गई है। ये हवाई अड्डे उत्तर प्रदेश को देशभर के प्रमुख नगरों एवं महानगरों से जोड़ते हैं, जिससे राज्य के आर्थिक विकास एवं पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है। घरेलू उड़ानों के अतिरिक्त उत्तर प्रदेश सरकार अब अंतर्राष्ट्रीय गंतव्यों तक उड़ाने संचालित करने की दिशा में कार्य कर रही है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में कुल चार अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे संचालित हैं. जो विश्व के प्रमुख गंतव्यों तक पहुंच प्रदान करते हैं। लखनऊ, अयोध्या, कुशीनगर तथा वाराणसी जैसे प्रमुख नगरी में स्थित ये हवाई अड्डे विदेशी यात्रियों को वायुमार्ग से यात्रा के बेहतर विकल्प प्रदान करते हैं। साथ ही व्यापार, पर्यटन एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान की सुविधा प्रदान करते हैं। गौतम बुद्ध नगर के जेवर में निर्माणाधीन नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा अब निर्माण के अंतिम चरण में है। इसके संचालन से उत्तर प्रदेश देश में 05 अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों का संचालन करने वाला पहला राज्य बन जायेगा।

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