60 साल की सेवा, चार युद्धों की शान, और अब एक गौरवमयी विदाई
“जिसने दुश्मनों को आसमान में हराया, वो आज इतिहास के आसमान में अमर हो गया।”
भारतीय वायुसेना के इतिहास में ऐतिहासिक दिन
भारतीय वायुसेना (IAF) ने आज उस योद्धा को अंतिम सलामी दी, जिसने छह दशकों तक आकाश की सीमाओं की रक्षा की, जिसने हर युद्ध में दुश्मनों के होश उड़ाए, और जिसने हजारों पायलटों को न केवल उड़ना सिखाया, बल्कि लड़ना भी।
मिग-21, भारत का पहला सुपरसोनिक लड़ाकू विमान, अब आधिकारिक रूप से सेवा से विदा हो चुका है। लेकिन इसकी गरज, इसकी उड़ान, और इसकी गाथा – सदैव भारत के सैन्य इतिहास में गूंजती रहेगी।
मिग-21: एक उड़ता इतिहास
- 1963 में भारतीय वायुसेना में शामिल हुआ यह सोवियत मूल का विमान, जल्द ही भारतीय स्काई डिफेंस का रीढ़ बन गया।
- 874 विमान भारत ने समय के साथ प्राप्त किए, जिनमें सबसे उन्नत संस्करण मिग-21 बाइसन रहा, जो 2013 तक निर्मित होता रहा।
- इसकी अभूतपूर्व गति, मारक क्षमता और बहुआयामी उपयोगिता ने इसे दशकों तक प्रासंगिक बनाए रखा।
जहाँ युद्ध था, वहाँ मिग-21 था
- 1965 और 1971 के युद्धों में, मिग-21 ने पाकिस्तानी विमानों को पछाड़ते हुए वायुसेना को निर्णायक बढ़त दिलाई।
- 1971 में ढाका के गवर्नर हाउस पर की गई बमबारी ने इतिहास बदल दिया — पूर्वी पाकिस्तान के नेताओं को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर कर दिया।
- 1999 के कारगिल युद्ध में भी इसकी भूमिका स्मरणीय रही।
- और 2019 बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद, जब एक मिग-21 बाइसन ने पाकिस्तान के अत्याधुनिक F-16 को मार गिराया — तब दुनिया ने जाना कि यह बुजुर्ग विमान अभी भी शेर है।
सेना का साथी, पायलटों का गुरु
मिग-21 सिर्फ एक युद्धक विमान नहीं था।
यह प्रशिक्षण का मंच था, साहस की परीक्षा था, और एक उड़ता हुआ आत्मविश्वास था।
पायलटों की कई पीढ़ियाँ इसी विमान में तैयार हुईं। इसने न केवल उड़ना सिखाया, बल्कि संकट में टिके रहना भी।
विदाई की आखिरी उड़ान: गर्व और आंसू
भारतीय वायुसेना ने मिग-21 को एक राजकीय सम्मान के साथ विदा किया:
- एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने अंतिम उड़ान में स्वयं मिग-21 का कॉकपिट संभाला।
- स्क्वाड्रन लीडर प्रिया शर्मा ने इस ऐतिहासिक स्क्वाड्रन की अगुवाई की — एक नया अध्याय रचते हुए।
- सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम, जगुआर फाइटर जेट, और आकाश गंगा स्काईडाइवर्स ने आकाश में एक भव्य प्रदर्शन किया।
- छह मिग-21 विमानों ने समवेत लैंडिंग के साथ अंतिम सलामी दी।
- परंपरागत वाटर कैनन सलामी ने इस युग का औपचारिक समापन किया।
गौरव के पीछे छिपा दर्द
लेकिन इस महान गाथा का एक कड़वा सच भी रहा —
- 400 से अधिक दुर्घटनाएँ, जिनमें कई होनहार पायलटों की जान गई।
- तकनीकी सीमाओं, पुरानी प्रणाली, और रखरखाव की चुनौतियों ने मिग-21 को धीरे-धीरे “उड़ता ताबूत” और “विधवा निर्माता” जैसे भयावह उपनाम दिए।
इन्हीं कारणों से इसे चरणबद्ध रूप से सेवानिवृत्त किया गया, भले ही इसकी सेवा को नमन करने वालों की संख्या कभी कम नहीं हुई।
🇮🇳 अब बारी है तेजस की
मिग-21 के सेवानिवृत्त होते ही भारत की आसमान की बागडोर अब स्वदेशी HAL तेजस के हाथों में जा रही है।
यह केवल तकनीक का परिवर्तन नहीं, बल्कि भारत की आत्मनिर्भरता और आधुनिकता की उड़ान है।
मिग-21: अंत नहीं, अमरता की शुरुआत
मिग-21 अब नहीं उड़ेगा — लेकिन इसके किस्से, इसके शौर्य, और इसके बलिदान की गूंज पीढ़ियों तक सुनाई देगी।
यह विमान कभी थकता नहीं था, कभी झुकता नहीं था।
और आज जब वह सेवानिवृत्त हो रहा है, तो पूरा देश उसे एक ही स्वर में सलाम कर रहा है:



