Friday, March 6, 2026
spot_img
Homeअन्तराष्ट्रीयसोनम वांगचुक की पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, NSA के...

सोनम वांगचुक की पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, NSA के तहत गिरफ्तारी को बताया अवैध

नई दिल्ली/लेह – प्रख्यात पर्यावरण कार्यकर्ता और इंजीनियर सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर उनके पति की तत्काल रिहाई की मांग की है। वांगचुक को 26 सितंबर को लद्दाख में हुई हिंसक झड़पों के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया था। वे वर्तमान में राजस्थान की जोधपुर जेल में बंद हैं।

गिरफ्तारी पर सवाल, आरोपों को बताया “झूठा और बेबुनियाद”

गीतांजलि ने याचिका में कहा है कि वांगचुक की गिरफ्तारी पूरी तरह से गैरकानूनी और मनमानी है, और अब तक उन्हें कोई आधिकारिक हिरासत आदेश भी नहीं दिया गया है, जो खुद कानून का उल्लंघन है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वांगचुक को पाकिस्तान से कथित संबंध होने के झूठे आरोप में फंसाया जा रहा है, जो न केवल दुर्भावनापूर्ण है, बल्कि एक ऐसे राष्ट्रभक्त पर आक्षेप है, जिसने हमेशा भारतीय सेना और संविधान के प्रति निष्ठा दिखाई है।

“अपने पति से संपर्क तक नहीं कर पा रही हूं” – गीतांजलि का दर्द

याचिका में गीतांजलि ने अदालत से कहा:

“मैं न अपने पति से संपर्क कर पा रही हूं, न ही उन्हें उचित कानूनी सहायता मिल पा रही है। हमें अब तक यह भी नहीं बताया गया कि उन्हें किन धाराओं में और किस आधार पर हिरासत में लिया गया है। यह पूरी प्रक्रिया न्याय और मानवाधिकारों का गला घोंटने जैसी है।”

राष्ट्रपति से लगाई न्याय की गुहार

गीतांजलि ने सुप्रीम कोर्ट से पहले, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी मुलाकात कर तीन पन्नों का ज्ञापन सौंपा, जिसमें उन्होंने इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की।
उन्होंने अपने पत्र में लिखा:

“वांगचुक को जनहित के मुद्दों पर काम करने के चलते झूठे ‘जासूसी’ जैसे आरोपों में फंसाया गया है। वे न केवल लद्दाख के, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा हैं — उन्होंने जीवन भर पर्यावरण, शिक्षा और सामाजिक सुधारों के लिए काम किया है।”

लद्दाख में हिंसा के बाद NSA के तहत की गई थी कार्रवाई

गौरतलब है कि 24 सितंबर को लद्दाख में उस समय हिंसा भड़क उठी थी, जब स्थानीय लोग राज्य का दर्जा बहाल करने और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे।
इस दौरान हुई झड़पों में 4 लोगों की मौत हो गई थी और कई घायल हुए थे। इसके दो दिन बाद, प्रशासन ने सोनम वांगचुक को NSA के तहत हिरासत में लिया।

क्या पर्यावरण के लिए लड़ना अपराध है?

गीतांजलि ने यह सवाल उठाया कि –

“क्या लद्दाख जैसे नाज़ुक पारिस्थितिक क्षेत्र में अनियंत्रित विकास के खिलाफ आवाज़ उठाना अपराध है? क्या जलवायु परिवर्तन के खतरों से देश को आगाह करना राष्ट्रद्रोह है?”

उन्होंने आगे कहा कि उत्तराखंड, हिमाचल और पूर्वोत्तर भारत में हुई हालिया प्राकृतिक आपदाएं यह स्पष्ट करती हैं कि समय रहते सचेत होना कितना जरूरी है।

“राष्ट्र के लिए समर्पित एक सच्चा सिपाही”

गीतांजलि ने वांगचुक की छवि को लेकर कहा:

“वह एक ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने अपने जीवन का हर पल लद्दाख और भारत माता की सेवा में समर्पित किया है। वे किसी भी प्रकार से राष्ट्र की सुरक्षा के लिए खतरा नहीं, बल्कि इसके रक्षक हैं।”

अब आगे क्या?

सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर जल्द सुनवाई कर सकता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कोर्ट NSA जैसी कठोर कार्रवाई को उचित ठहराता है, या इसे न्याय और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन मानते हुए वांगचुक की रिहाई का आदेश देता है।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -spot_img

Most Popular

Recent Comments