नई दिल्ली: बुधवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले शुरुआती कारोबार में 88 पैसे की मजबूती के साथ 87.93 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। यह तेजी रुपये के लिए राहतभरी है, खासकर तब जब मंगलवार को यह अपने सर्वकालिक निचले स्तर 88.81 पर बंद हुआ था। बाजार विशेषज्ञों ने इस मजबूती के पीछे कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से हस्तक्षेप की संभावनाओं को प्रमुख कारण बताया।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया सुबह 88.74 के स्तर पर खुला, लेकिन कारोबार के दौरान तेजी पकड़ते हुए 87.93 तक पहुंच गया। हालांकि, कारोबार के कुछ समय बाद यह 88.33 पर स्थिर हो गया। दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले छह प्रमुख मुद्राओं को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.20 प्रतिशत गिरकर 98.85 पर आ गया, जो विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की कमजोरी को दर्शाता है।
घरेलू शेयर बाजारों में भी सकारात्मक माहौल बना रहा। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 354.57 अंक की बढ़त के साथ 82,384.55 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 109.55 अंक बढ़कर 25,255.05 अंक पर ट्रेड कर रहा था। कच्चे तेल की कीमतें भी 0.43 प्रतिशत गिरकर 62.12 डॉलर प्रति बैरल हो गईं, जिससे घरेलू मुद्रा को अतिरिक्त सहारा मिला।
वहीं, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की बात करें तो मंगलवार को वे बिकवाल रहे और शुद्ध रूप से 1,508.53 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। विशेषज्ञ मानते हैं कि विदेशी निवेशकों के निकासी के बावजूद रुपये की मजबूती कच्चे तेल की कीमतों में कमी और आरबीआई के हस्तक्षेप की उम्मीदों के कारण संभव हो पाई है।



