“33 साल से इंतजार था… जिंदा रहने के लिए धन्यवाद महादेव”
अहमदाबाद | गोरखपुर से सांसद और सिनेमा जगत में तीन दशक से ज्यादा समय तक सक्रिय अभिनेता रवि किशन के लिए शनिवार की रात यादगार बन गई। अहमदाबाद में आयोजित 70वें फिल्मफेयर अवॉर्ड समारोह में उन्हें फिल्म ‘लापता लेडीज’ के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता (बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर) का खिताब मिला।
नाम की घोषणा होते ही रवि किशन की आंखें नम हो गईं। भावुक होते हुए उन्होंने मंच को झुककर प्रणाम किया और कहा,
“750 फिल्में कर चुका हूं, लेकिन आज पहली बार ये ब्लैक लेडी हाथ में आई है। 33 साल से इस पल का इंतजार था। मुझे जिंदा रखने के लिए धन्यवाद महादेव।”
‘श्याम मनोहर’ बनकर जीता दिल
फिल्म ‘लापता लेडीज’ में रवि किशन ने एक ईमानदार और देसी पुलिस अफसर श्याम मनोहर की भूमिका निभाई थी, जिसे दर्शकों और समीक्षकों से सराहना मिली। फिल्म का निर्देशन किरण राव ने किया था और इसे आमिर खान प्रोडक्शंस ने प्रोड्यूस किया।
रवि किशन ने बताया कि फिल्म की स्क्रिप्ट उन्हें तब ऑफर की गई जब वे संसद सत्र में व्यस्त थे।
“किरण राव मैम ने मुझे कॉल किया और दिल्ली मिलने आईं। आमिर सर ने भी ऑडिशन लिया। मुझे एक देसी पुलिस अफसर के रोल में देखकर उन्होंने कहा – यही चाहिए।”
छोटा बजट, बड़ी उड़ान
इस फिल्म का बजट महज ₹5 करोड़ था, लेकिन यह अपनी सादगी, कहानी और अभिनय के दम पर राष्ट्रीय से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंची। रवि किशन ने मंच से कहा—
“यह फिल्म एक उदाहरण है कि संसाधन कम हों, तो भी सिनेमा बड़ा हो सकता है, अगर सोच साफ हो।”
परिवार और महादेव को समर्पित
रवि किशन ने अपने संबोधन में अपनी पत्नी प्रीति, बच्चों और समर्थकों का भी धन्यवाद किया।
“मेरे परिवार ने हमेशा मेरा साथ दिया। संघर्ष के दिनों में जब कुछ नहीं था, तब भी मेरी आस्था टूटी नहीं। ये सम्मान महादेव की कृपा है।”
शाहरुख खान से प्रेरणा का किस्सा
मंच से उतरते समय रवि किशन ने अभिनेता शाहरुख खान का एक किस्सा साझा करते हुए कहा:
“फिल्म ‘आर्मी’ के सेट पर शाहरुख सर को तेज बुखार था, फिर भी उन्होंने पूरी एनर्जी के साथ शूट किया। तब मैंने जाना, कि यूं ही कोई शाहरुख खान नहीं बनता।”
70वें फिल्मफेयर अवॉर्ड्स की मुख्य झलकियां
| श्रेणी | विजेता |
|---|---|
| बेस्ट फिल्म | लापता लेडीज |
| बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर | रवि किशन |
| निर्देशक | किरण राव |
| बजट | ₹5 करोड़ |
| प्रशंसा | ऑस्कर तक पहुंची चर्चा |
संघर्ष से सम्मान तक
रवि किशन की यह उपलब्धि केवल एक अवॉर्ड नहीं, बल्कि उनके तीन दशकों के कठिन परिश्रम और सिनेमा के प्रति समर्पण की मान्यता है। एक ऐसे कलाकार की जीत है, जो ग्लैमर की चकाचौंध में भी अपनी जमीन और जुड़ाव को नहीं भूला।



