Friday, March 6, 2026
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रणथंभौर की खूंखार बाघिन ‘कनकटी’ मुकंदरा में दहाड़ेगी:7 साल के बच्चे और रेंजर को मारा था

कोटा: सवाई माधोपुर के रणथंभौर में 7 साल के बच्चे और रेंजर पर हमला कर मारने वाली खूंखार बाघिन RBT 2507 ‘कनकटी’ को कोटा शिफ्ट किया जा रहा है। रणथंभौर से वन विभाग की टीम बाघिन को लेकर मुकंदरा (कोटा) के लिए रवाना हो गई हैं। वहीं ‘कनकटी’ के आने के बाद उसकी मां बाघिन टी 84 एरोहेड की मौत हो गई। इसके ब्रेन ट्यूमर था।

सीसीएफ सुगनाराम ने बताया- बाघिन को ट्रेंकुलाइज कर लिया गया है। टीम उसे कोटा लेकर रवाना हुई है। बाघिन को मुकंदरा में दरा के सॉफ्ट एनक्लोजर में रखा जाएगा। कुछ दिन मॉनिटरिंग के बाद जंगल में छोड़ा जाएगा। मुकंदरा में अभी तक 3 टाइगर है। एक मेल एमटी 5 व 2 फीमेल एमटी 6 व एमटी 7 है। एमटी 7 को अभेड़ा से शिफ्ट किया गया था।

बाघिन ‘मछली’ की नातिन है बाघिन ‘कनकटी’

रणथम्भौर के सीनियर गाइड शाकिर अली ने बताया- बाघिन ‘कनकटी’ की मां बाघिन टी 84 ‘ऐरोहेड’ और पिता बाघ टी 120 ‘गणेश’है। बाघिन ‘मछली’ की नातिन है।

बाघिन ‘कनकटी’ को 25 जुलाई 2023 को पहली बार शिवराज एनीकेट जोन नंबर-2 पर अपनी मां बाघिन ‘ऐरोहेड’, बहन और भाई के साथ देखा गया था। एरोहेड के मेल शावक को करौली में केलादेवी अभयारण में शिफ्ट किया गया था। वहीं फीमेल शावक को 17 जून को बूंदी के रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में शिफ्ट किया गया था।

बाघिन ‘कनकटी’ की मां की मौत

वन विभाग की टीम आज सुबह बाघिन ‘कनकटी’ को रणथंभौर से लेकर निकली थी। पीछे से उसकी मां बाघिन टी 84 एरोहेड की मौत हो गई। उसका जोन नम्बर दो में शव मिला। उसे ब्रेन ट्यूमर था।

रणथंभौर में बच्चे और रेंजर को मारा था बाघिन ‘कनकटी’ के हमले में सवाई माधोपुर के रणथंभौर में एक 7 साल के बच्चे सहित रेंजर की मौत हो गई थी।

इस तरह किया था हमला

बाघिन ने कार्तिक सुमन (7) पुत्र द्वारका माली निवासी गोहटा थाना देई खेड़ा (बूंदी) को मार डाला था। बच्चा अपनी दादी के साथ त्रिनेत्र गणेश के दर्शन कर लौट रहा था। अचानक जंगल से बाघिन आई और बच्चे को मुंह में दबोचकर ले गई। बाघिन काफी देर तक बच्चे की गर्दन पर पंजा रखकर बैठी रही थी। वनकर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद बाघिन को भगाया था लेकिन बच्चे की जान नहीं बच पाई थी।

रेंजर के शव पर 20 मिनट बैठी रही थी बाघिन

रेंजर देवेन्द्र चौधरी दोपहर में जंगल के अंदर की तरफ गए थे। वे जंगल के अंदर चौकी से दूसरे रास्ते से गए थे। निरीक्षण के बाद वे वापस जोगी महल आए थे। उन्हें अमित नामक फोरेस्ट गार्ड बाइक से छोड़ने के लिए आया था। जोगी महल से आगे विभाग की चौकी है। करीब सौ मीटर पहले ही देवेन्द्र बाइक से उतर गए और गार्ड को वापस भेज दिया। उन्होंने कहा कि वह वहां चल रहे निर्माण कार्य का निरीक्षण करते हुए जाएंगे।

इसके बाद वह पैदल चौकी की तरफ बढ़ने लगे। इसी दौरान झाड़ियों में छिपी टाइग्रेस ने उन पर हमला कर दिया। हमला इतना तेज था कि देवेन्द्र को शोर मचाने का या संभलने का कोई मौका नहीं मिला। टाइग्रेस उन्हें खींच कर झाड़ियों के अंदर ले जाने लगी। इस दौरान वहां से गुजर रहे एक फोरेस्ट गार्ड ने देख लिया। टाइग्रेस करीब बीस मिनट तक शव के ऊपर बैठी रही थी। जैसे-तैसे कर कर्मचारियों ने उसे दूर किया और बॉडी रिकवर की।

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