नई दिल्ली। 2025 और 2026 के बड़े विधानसभा चुनावों को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी रणनीतिक तैयारियों की शुरुआत कर दी है। गुरुवार को पार्टी ने बिहार, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के लिए चुनाव प्रभारी और सह प्रभारी नियुक्त किए हैं। यह नियुक्तियाँ इन राज्यों में भाजपा की चुनावी पकड़ को मजबूत करने और संगठनात्मक तैयारी को धार देने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही हैं।
बिहार: धर्मेंद्र प्रधान को फिर मिली बड़ी ज़िम्मेदारी
बिहार, जहां इस साल अक्टूबर-नवंबर 2025 में विधानसभा चुनाव होने हैं, वहां की बागडोर एक बार फिर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को सौंपी गई है। वे राज्य में भाजपा के एक अनुभवी रणनीतिकार माने जाते हैं। उनके साथ दो सह प्रभारी नियुक्त किए गए हैं:
- केशव प्रसाद मौर्य — उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री
- सी. आर. पाटिल — केंद्रीय जल शक्ति मंत्री
बिहार में इस वक्त भाजपा और जेडीयू (नीतीश कुमार) की गठबंधन सरकार है। ऐसे में धर्मेंद्र प्रधान की नियुक्ति यह संदेश देती है कि भाजपा इस बार भी संगठन और सत्ता के संतुलन को साधने की रणनीति अपना रही है।
पश्चिम बंगाल: TMC के गढ़ में सेंध लगाने की तैयारी
2026 में होने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव को चुनाव प्रभारी और त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब को सह प्रभारी नियुक्त किया है। यह टीम ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) के गढ़ में भाजपा की पकड़ को और मजबूत करने की रणनीति पर काम करेगी।
2021 में भाजपा ने बंगाल में जोरदार प्रदर्शन करते हुए खुद को मुख्य विपक्षी दल के रूप में स्थापित किया था। अब पार्टी की कोशिश है कि उस प्रदर्शन को स्थायी जनाधार में बदला जाए।
तमिलनाडु: दक्षिण में विस्तार की कोशिश, बैजयंत पांडा को कमान
तमिलनाडु जैसे चुनौतीपूर्ण राज्य में भाजपा ने सांसद और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बैजयंत ‘जय’ पांडा को चुनाव प्रभारी नियुक्त किया है। उनके साथ मुरलीधर मोहोल, जो पुणे के पूर्व महापौर और वर्तमान में सांसद हैं, सह प्रभारी बनाए गए हैं।
तमिलनाडु में फिलहाल DMK की सरकार है, और भाजपा अब वहां संगठन के विस्तार और क्षेत्रीय सहयोग के जरिए नई जमीन तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।
क्या है भाजपा की रणनीति?
इन नियुक्तियों से स्पष्ट है कि भाजपा अब चुनावों को लेकर दीर्घकालिक और ज़मीन-स्तर की रणनीति पर काम कर रही है:
- अनुभवी नेताओं को जमीनी ज़िम्मेदारी देकर संगठन को मज़बूत किया जा रहा है
- गैर-हिंदीभाषी राज्यों में पकड़ बढ़ाने के लिए समर्पित प्रयास हो रहे हैं
- गठबंधन, जातीय समीकरण और बूथ स्तर की रणनीति पर फोकस बढ़ रहा है
नज़र डालिए: किस राज्य की जिम्मेदारी किसके पास
| राज्य | प्रभारी | सह प्रभारी |
|---|---|---|
| बिहार | धर्मेंद्र प्रधान | केशव प्रसाद मौर्य, सी. आर. पाटिल |
| पश्चिम बंगाल | भूपेंद्र यादव | बिप्लब कुमार देब |
| तमिलनाडु | बैजयंत पांडा | मुरलीधर मोहोल |
भाजपा ने जिस तेज़ी और स्पष्टता के साथ चुनावी ज़िम्मेदारियाँ सौंपी हैं, उससे यह साफ है कि पार्टी 2025-26 के चुनावी संग्राम के लिए अब पूरी तरह से युद्धभूमि में उतर चुकी है। बिहार में सत्ता की रक्षा, बंगाल में विपक्ष से सत्ता तक की छलांग, और तमिलनाडु में राजनीतिक जमीन तैयार करना — ये तीनों मिशन अब पूरी तरह एक्टिव मोड में हैं।



