नोएडा | नोएडा के सेक्टर-51 स्थित एक निर्माण स्थल पर काम कर रहे 41 वर्षीय मजदूर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से शुक्रवार सुबह पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। मृतक मजदूर की पहचान झारखंड के दुमका निवासी राजेश के रूप में हुई है, जो साइट पर फिटर के पद पर कार्यरत था।
गुरुवार रात अचानक राजेश की तबीयत बिगड़ गई। साथी मजदूरों की मदद से उसे जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मौत के कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट न होने पर पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
न्याय की मांग को लेकर फूटा मजदूरों का गुस्सा
घटना के अगले ही दिन शुक्रवार सुबह राजेश के दर्जनों साथियों ने सेक्टर-32 स्थित एलिवेटेड रोड के नीचे सड़क पर जाम लगा दिया। वे राजेश की मौत की जांच और उसके परिवार को मुआवज़ा दिलाने की मांग कर रहे थे।
प्रदर्शन कर रहे मजदूरों का कहना था कि निर्माण कंपनियां सिर्फ काम निकलवाने के लिए श्रमिकों का इस्तेमाल करती हैं, लेकिन जब किसी पर विपत्ति आती है तो न तो कोई मदद करता है, न जवाबदेही तय होती है।
पुलिस की सूझबूझ से खुला जाम
घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे स्थानीय पुलिस अधिकारी और प्रशासनिक टीम ने प्रदर्शनकारियों को समझाया और आश्वासन दिया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद धीरे-धीरे स्थिति सामान्य हुई और यातायात बहाल किया गया।
क्या कहती है यह घटना?
इस घटना ने एक बार फिर प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधा और कार्यस्थल पर मूलभूत अधिकारों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या निर्माण स्थलों पर काम करने वाले श्रमिकों को ज़रूरी मेडिकल सुविधाएं समय पर मिल रही हैं? क्या नियोक्ताओं की कोई जवाबदेही है?
राजेश अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके साथियों का आक्रोश यही दर्शाता है कि मजदूर वर्ग को अभी भी अपने अधिकारों के लिए सड़क पर उतरना पड़ता है।
आगे क्या होगा?
- पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतज़ार
- कानूनी कार्रवाई की तैयारी
- राजेश के परिवार को मुआवज़ा मिलेगा या नहीं, यह प्रशासन की अगली कार्रवाई पर निर्भर करेगा।
यह सिर्फ एक मौत नहीं, बल्कि व्यवस्था पर एक सवाल है। क्या नोएडा जैसे विकसित शहर में भी मजदूरों की जान इतनी सस्ती है?



