सुशीला कार्की का पीएम बनना लगभग तय, लेकिन संसद भंग को लेकर राष्ट्रपति अड़े
प्रदर्शनकारियों में फूट, सुशीला को बताया भारत समर्थक
काठमांडू | नेपाल इस वक्त गंभीर राजनीतिक संकट और जनआंदोलन के दोहरे मोर्चे पर जूझ रहा है। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद उपजे सत्ता संघर्ष ने अब तक 51 लोगों की जान ले ली है। राजधानी समेत देशभर में भीषण हिंसा, कर्फ्यू और इंटरनेट पर प्रतिबंध जैसे हालात हैं।
सुशीला कार्की: पीएम बनने की दौड़ में सबसे आगे
- सूत्रों के मुताबिक, पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री बनाए जाने पर लगभग सहमति बन चुकी है।
- वे नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश रह चुकी हैं, और उनकी छवि निर्भीक, ईमानदार और संविधानवादी रही है।
- लेकिन… एक बड़ी अड़चन सामने है — संविधान।
संविधान बना संकट का केंद्र
- संविधान के अनुसार, किसी गैर-सांसद को पीएम तभी बनाया जा सकता है जब संसद भंग हो।
- लेकिन राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल संसद भंग करने को तैयार नहीं।
- सुशीला कार्की का तर्क है: “जब तक संसद भंग नहीं होगी, मेरा प्रधानमंत्री बनना असंवैधानिक होगा।”
सड़कों पर Gen-Z का विद्रोह… लेकिन आपस में बंटा गुट
- विरोध प्रदर्शनों में सबसे आगे जनरल-Z (Gen-Z) युवा हैं।
- लेकिन कल आंदोलन के दौरान युवाओं के दो गुट आपस में भिड़ गए।
- एक गुट ने आरोप लगाया कि सुशीला कार्की “भारत समर्थक” हैं और भारत की मदद से पीएम बनना चाहती हैं।
- इस मुद्दे पर मारपीट, पोस्टर जलाने और पत्थरबाज़ी जैसी घटनाएं सामने आई हैं।
सेना का सख्त कदम: चौथे दिन भी कर्फ्यू
- काठमांडू, ललितपुर, भक्तपुर सहित कई जिलों में सेना ने मोर्चा संभाल लिया है।
- चौथे दिन भी 24 घंटे का कर्फ्यू लागू है।
- इंटरनेट स्पीड कम कर दी गई है ताकि सोशल मीडिया पर भड़काऊ कंटेंट न फैले।
- सुरक्षा बलों को ‘देखते ही गिरफ्तार’ की छूट मिल गई है।
कौन हैं सुशीला कार्की?
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| नाम | सुशीला कार्की |
| उम्र | 73 वर्ष |
| पद | नेपाल की पहली महिला चीफ जस्टिस (2016-2017) |
| विशेषता | सख्त, भ्रष्टाचार विरोधी रुख, संविधान विशेषज्ञ |
| विवाद | भारत के प्रति झुकाव होने का आरोप |
अंतरराष्ट्रीय नजरें नेपाल पर
- भारत, चीन, अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र की नजरें नेपाल की अस्थिरता पर टिकी हैं।
- भारत ने नेपाल सीमा पर सतर्कता बढ़ाई है।
- कई देशों ने ट्रैवल एडवाइजरी जारी कर दी है।
अब क्या आगे?
- क्या राष्ट्रपति संसद भंग करेंगे?
- क्या सुशीला कार्की संवैधानिक संकट का हल निकाल पाएंगी?
- क्या नेपाल एक बार फिर लोकतंत्र से पीछे हटेगा?
निष्कर्ष:
नेपाल सिर्फ एक राजनीतिक संकट नहीं झेल रहा — यह संविधान, लोकतंत्र, और जनआंदोलन की त्रिमूर्ति परीक्षा है।
जहां एक ओर सत्ता की कुर्सी पर खींचतान है, वहीं सड़कों पर भविष्य के लिए लड़ते युवा खड़े हैं।



