Sunday, March 8, 2026
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जापानी तकनीकी से खेती करेंगे किसान:आय होगी दोगुनी, पैदावार भी बढ़ेगी

कानपुर : संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन (यूनिडो) जापान द्वारा वित्तपोषित परियोजना जापान से तकनीकी हस्तांतरण के माध्यम से अफ्रीका एवं एशिया में औद्योगिक व्यवसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। तीन दिवसीय इस कार्यक्रम का समापन चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय (CSA), कानपुर में हुआ।

अधिक आय प्राप्त की जाएगी

कार्यक्रम कुलपति डॉ. आनन्द कुमार सिंह की अध्यक्षता मे सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर कुलपति द्वारा परियोजना के वित्तपोषण के लिए यूनिडो जापान एवं उत्तर प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त करते हुए बताया कि सब्जी उत्पादन की नवीन कृषि तकनीकों के अंगीकरण एवं उनके व्यवसायीकरण के द्वारा उच्च गुणवत्तायुक्त उत्पाद तैयार करने के साथ-साथ अधिक आय भी प्राप्त की जा सकती है।

जापानी आईमेक तकनीक है बेहतर

कुलपति ने बताया कि देश में लाभप्रद कृषि तकनीकों के अंगीकरण की पर्याप्त संभावनाएं है। उन्होंने जापानी आईमेक तकनीक की प्रशंसा करते हुए बताया कि यह तकनीक प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में सहायक है।

मेबिआल इंक. जापान के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. हिरोशी योशियोका ने कहा कि आईमेक तकनीक भारतीय कृषि के विकास में क्रान्तिकारी बदलाव ला सकती है। राष्ट्रीय परियोजना समन्वयक यूनीडो नई दिल्ली रेखा जैन द्वारा बताया गया कि परियोजना के अन्तर्गत आयोजित व्यवसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों में महिलाओं की 40 प्रतिशत भागीदारी परियोजना की सफलता को दर्शाती है।

आईमेक तकनीक पर चर्चा की

राष्ट्रीय परियोजना सहायक यूनीडो आदित्य अरोड़ा द्वारा आईमेक तकनीक पर चर्चा करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा परियोजना के सभी घटकों के नियोजित लक्ष्यों की प्राप्ति की है। इस अवसर पर कोर्स निदेशक डॉ. पीके सिंह द्वारा परियोजना के अन्तर्गत विगत लगभग एक वर्ष की उपलब्धियों का प्रस्तुतीकरण करते हुए बताया कि विश्वविद्यालय के शाकभाजी अनुभाग पर आईमेक तकनीक पर प्रदर्शन इकाई स्थापित की गयी है जो किसानों एवं युवाओं का कौशल विकास करेगी तथा सब्जी के गुणवत्तायुक्त उत्पादन को एक नई दिशा मिलेगी।

ऐसी तकनीकी के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे

कार्यक्रम का संचालन करते हुए कोर्स समन्वयक डॉ. राजीव ने बताया कि भविष्य में भी इसी प्रकार जापानी तकनीक के हस्तांतरण के लिए निरन्तर प्रयास किए जाएंगे। इस अवसर पर अधिष्ठाता कृषि वानिकी अधिष्ठाता उद्यान निदेशक प्रसार निदेशक प्रशासन एवं मानीटरिंग संकाय सदस्यों उद्यमियों के साथ-साथ लगभग 50 शोध छात्र-छात्राओं द्वारा प्रतिभाग किया गया।

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