यूपी रेरा ट्रिब्यूनल ने जांच के आदेश दिए, कहा- 45 दिन के अंदर बिल्डर खरीददारों के रुपए लौटाए
गौतम बुद्ध नगर। उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट अपीलीय न्यायाधिकरण ने ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-27 स्थित एक आवासीय परियोजना के प्रमोटर को सख्त निर्देश दिए हैं। न्यायाधिकरण ने आदेश दिया है कि प्रमोटर 45 दिनों के भीतर घर खरीदारों को देरी का ब्याज चुकाए। टाउनशिप के मास्टर क्लब व गोल्फ कोर्स के नाम पर वसूले गए रुपए लौटाए।
इसके साथ ही प्रमोटर को पंजीकृत त्रिपक्षीय सब-लीज डीड में छूटी हुई जानकारी के लिए करेक्शन डीड कराने का भी निर्देश दिया गया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीत कुमार (अध्यक्ष) और रामेश्वर सिंह (प्रशासनिक सदस्य) की पीठ ने पारित किया।
न्यायाधिकरण ने एआर लैंडक्राफ्ट एलएलपी की अपीलों को खारिज कर दिया, जो 100 एकड़ की गोडरेज गोल्फ लिंक टाउनशिप के अंतर्गत गोडरेज क्रेस्ट रेजिडेंशियल क्लस्टर की प्रमोटर है। कंपनी ने 7 मार्च 2024 को यूपी रेरा द्वारा दिए गए आदेश को चुनौती देते हुए अपील दायर की थी।
कार्रवाई पर विचार करने का आदेश दिया गया
यूपी रेरा को 2016 के रेरा अधिनियम के तहत कार्रवाई पर विचार करने का आदेश दिया गया है। राज्य सरकार को यह भी जांच करने के निर्देश दिए गए हैं कि ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने आरईपी (रिक्रिएशनल एंटरटेनमेंट पार्क) योजना और भवन नियमों का उल्लंघन किया या नहीं, जिससे प्रमोटर को लाभ हुआ हो।
न्यायाधिकरण ने अपनी टिप्पणी में कहा कि प्रमोटर ने परियोजना की शुरुआत से ही धोखाधड़ीपूर्ण, अनुचित और भ्रामक प्रथाओं में लिप्त होकर काम किया।
अदालत के आदेश में क्या कहा गया-
प्रमोटर द्वारा परियोजना की शुरुआत से ही धोखाधड़ी, अनुचित और भ्रामक तरीके अपनाने की बात दर्ज की गई।
जीएनआईडीए द्वारा दी गई नियामक स्वीकृतियों पर गंभीर सवाल उठाए गए और रेरा को निर्देश दिया गया कि वह आरईपी योजना का पूरा रिकॉर्ड, स्वीकृत लेआउट और सब-लीज दस्तावेज प्रस्तुत करे।
प्रमुख सचिव को निर्देश दिए गए कि वे यह जांच करें कि जीएनआईडीए ने आरईपी योजना और भवन नियमों का उल्लंघन कर प्रमोटर को लाभ पहुंचाया या नहीं।
यह आकलन करने के निर्देश दिए गए कि रिक्रिएशनल ग्रीन एरिया और आरईपी योजना से संबंधित प्रक्रियाओं को दरकिनार किया गया या नहीं।
यह दर्ज किया गया कि खरीदारों को संपत्ति की प्रकृति, स्वामित्व हस्तांतरण और क्लब व गोल्फ कोर्स शुल्क (जो मूलत: वैकल्पिक थे) के बारे में गुमराह किया गया, और इन्हीं शुल्कों का उपयोग कब्जा और कन्वेयंस रोकने के लिए किया गया।
यह भी दर्ज किया गया कि प्रमोटर ने इन शुल्कों के माध्यम से लगभग 100 रुपए करोड़ इक_ा किए और आवंटियों से धोखाधड़ी कर धन वसूला।
त्रिपक्षीय सब-लीज डीड में गंभीर कमियां पाई गईं, जिनमें प्लॉट का आकार, एक्सक्लूसिव एरिया, सीमा विवरण और अनुपातहीन अविभाजित हिस्सेदारी का उल्लेख न होना शामिल है।
न्यायाधिकरण ने कहा कि ये उल्लंघन अलग-अलग चूक नहीं, बल्कि एक सुनियोजित पैटर्न का हिस्सा हैं, जो परियोजना की स्वीकृतियों, समझौतों और खरीदारों पर डाले गए वित्तीय दायित्वों में दिखाई देता है।
ग्रेटर नोएडा में प्रमोटर ने 100 करोड़ रुपए वसूले
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