गौतमबुद्धनगर : उप कृषि निदेशक/जिला कृषि रक्षा अधिकारी गौतमबुद्धनगर राजीव कुमार ने जनपद के समस्त कृषकों को बताया कि खरीफ फसलों में मुख्यतः धान, मक्का, मूॅगफली, उर्द/मूॅग एवं गन्ना प्रमुख फसले है। वर्तमान में प्रदेश के विभिन्न जनपदों में वर्षा एवं तापमान में उतार-चढाव के कारण फसलों में लगने वाले सामायिक कीट/रोग के प्रकोप की सम्भावना के दृष्टिगत बचाव एवं प्रबन्धन हेतु कृषक बिंदुवार फसलवार सुझाव एवं संस्तुतियाॅ अपना कर फसल को सामायिक कीट/रोग के प्रकोप बचा सकते हैं।
धान-
● संकरी एवं चोडी पत्ती खरपवार- इस प्रकार के खरपतवारों के नियंत्रण हेतु प्रेटिलाक्लोर 50 प्रतिशत ई0सी0 1.5 लीटर अथवा एनीलोफास 30 प्रतिशत ई0सी0 1.25-1.5 लीटर अथवा पाइराजोसल्फ्यूरान इथाइल 10 प्रतिशत डब्लू0पी0 0.15 किग्रा को 500-600 लीटर पानी में घोलकर फ्लैटफैन नाॅजिल से 2 इंच भरे पानी में रोपाई के 3-5 दिन के अन्दर छिड़काव करना चाहिए। विसपाइरीबैक सोडियम 10 प्रतिशत एस0सी-0.200 ली0 रोपाई के 15-20 दिन के बाद की स्थिति में 300 ली0 पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए ।
● दीमक एवं जड़ की सूडी- इसके नियंत्रण हेतु क्लोरपाइरीफास 20 प्रतिशत ई0सी0 2.5 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से सिंचाई के पानी के साथ प्रयोग करना चाहिए।
● खैरा रोग- खैरा रोग के नियंत्रण हेतु 5 कि0ग्रा0 जिंक सल्फेट को 20 कि0ग्रा0 यूरिया अथवा 2.50 कि0ग्रा0 बुझे हुए चूने को प्रति हेक्टेयर की दर से 1000 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए।
● तना छेदक- तना छेदक से बचाव हेतु फेरोमोन ट्रैप (एस0बी0ल्योर) 6-8 प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करना चाहिए तथा इसके रासायनिक नियंत्रण हेतु क्यूनालफॅास 25 प्रतिशत ई0सी0 1.5 लीटर अथवा कलोरोपाइरीफास 20 प्रतिशत ई0सी0 1.2 ली0 अथवा फिप्रोनिल 5 प्रतिशत एस0सी0 1.0-1.5 लीटर 500-600 लीटर का घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर की दर से अथवा कारटाप हाइड्रोक्लोराइड 4 जी0 की 18 कि0ग्रा0 मात्रा को प्रति हेक्टेयर की दर से 3-5 सेमी0 स्थिर पानी में बिखेर कर प्रयोग करे।
● पत्ती लपेटक- पत्ती लपेटक कीट के नियंत्रण हेतु क्लोरपाइरीफास 20 प्रतिशत ई0सी0 अथवा क्यूनालफॅास 25 प्रतिशत ई0सी0 1.25 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से 500-600 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
● जीवाणु झुलसा एवं जीवाणुधारी रोग- जीवाणु झुलसा एवं जीवाणुधारी रोग के नियंत्रण हेतु स्यूडोमोनास फ्लोरिसेन्स 2 प्रतिशत ए0एस0 2 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से अथवा स्ट्रेप्टोमाइसिन सल्फेट 90 प्रतिशत+टेट्राइसाक्लिन हाइड्रोक्लोराइड 10 प्रतिशत की 15 ग्राम मात्रा को 500 ग्राम कापर आक्सीक्लोराइड 50 प्रतिशत डब्लू0पी0 के साथ मिलाकर 500-700 लीटर प्रति हेक्टेयर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
मक्का-
● मक्का में तना बेधक कीट का प्रकोप 10 प्रतिशत मृतगोभ की आर्थिक क्षति स्तर पर डाईमेथोएट 30 प्रतिशत ई0सी0 अथवा क्लोरेन्ट्रनिलिप्रोल 200 मिली0 अथवा इन्डाक्साकार्ब 500 मिली0 प्रति हेक्टेयर की दर से 500-600 लीटर पानी में घोलकर बनाकर छिड़काव करना चाहिए।
● फाल आर्मी वर्म- इस कीट के नियंत्रण हेतु स्पीनेटोरम 11.7 प्रतिशत एस0सी0-0.5 मिली0 क्लोरेन्ट्रनिलिप्रोल 18.5 प्रतिशत ई0सी0-0.4 मिली0 अथवा थायोमेक्साम 12.6 प्रतिशत+लैम्डा साईहैलोथ्रिन 9.5 प्रतिशत जेड0सी0-0.25 मिली0 को प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर भूहा (Tassel) की अवस्था से पूर्व छिडकाव करना चाहिए।
मॅूगफली-
● मॅूगफली में टिक्का रोग की रोकथाम हेतु मैन्कोजेब अथवा जिनेब 75 प्रतिशत घुलनशील चूर्ण की 2 किग्रा0 मात्रा को 500-600 लीटर पानी में घोलकर आवश्यकतानुसार 10-15 दिन के अन्तराल पर छिड़काव करना चाहिए।
● पत्ती लपेटक कीट के नियंत्रण हेतु प्रभावित भाग को तोडकर नाशीजीव के अण्डे समूह एवं इल्लियों को मिट्टी में दबाकर नष्ट कर देना चाहिए तथा एजाडिरेक्टिन 0.03 प्रतिशत डब्लू0एस0पी0 2.5 ली0 प्रति हेक्टेयर की दर से 500-600 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए।
अरहर
● पत्ती लपेटक कीट के नियंत्रण हेतु प्रभावित भाग को तोडकर नाशीजीव के अण्ड समूह एवं इल्लियों को मिट्टी में दबाकर नष्ट कर देना चाहिए तथा एजाडिरेक्टिन 0.03 प्रतिषत डब्लू0एस0पी0 2.5 ली0 प्रति हेक्टेयर की दर से 500-600 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए।
● अरहर की फसल में बन्झा (स्टेरिलिटी मोजैक) रोग से प्रभावित पौधों को उखाड कर मिट्टी में दबाकर नष्ट कर देना चाहिए तथा डाइमेथोएट 30 प्रतिशत ई0सी0- 01 लीटर मात्रा को 500-600 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने से रोग के प्रसार को रोका जा सकता है।
उर्द/मॅूग/सोयाबिन
● खरपतवार के नियंत्रण हेतु इमेजीथापर 10 प्रतिशत ई0 सी0 1000 मिली0 500 से 600 लीटर पानी के साथ प्रति है0 की दर से बुवाई के 10 से 15 दिनों पर छिड़काव करना चाहिए।
● पीला चित्तवर्ण रोग से ग्रसित पौधों को उखाड़कर मिट्टी में दबाकर नष्ट कर देना चाहिए।
● खेत एवं मेड़ो को खरपतवार से मुक्त रखेे।
● स्टिकी ट्रैप 6-8 प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करें।
● रोग के वाहक कीट सफेद मक्खी के रसायनिक नियंत्रण हेतु डाइमेथोएट 30 प्रतिशत ई0सी0- 01 ली0 मात्रा को 500-600 लीटर पानी में घोलकर प्रति है0 की दर से आवश्यकता अनुसार 10 से 15 दिन के अन्तराल पर 2 से 3 छिड़काव करने का सुझाव दिया गया।
गन्ना-
● गन्ने की फसल में पाइरिल्ला कीट से बचाव हेतु फसल की नियमित निगरानी करने के साथ-साथ पायरिला के प्राकृतिक शत्रु कीट एपीरिकोनिया मेलोनोल्यूका का फसल वातावरण में संरक्षण किया जाना चाहिए। परजीवी कीट की पर्याप्त उपस्थिति में पाइरिल्ला का स्वतः रोकथाम हो जाता है।
● गन्ने की फसल में टाॅप बोरर (चोटी बेधक) कीट के प्रकोप की स्थिति में ट्राइकोग्रामा किलोनिस के 50000-60000 अण्ड़े प्रति हेक्टेयर की दर से 3 बार प्रयोग करना चाहिए। टी0एस0बी0 ल्योर 6-8 प्रति हे0 की दर से भी प्रयोग कर चोटी बेधक कीट का नियंत्रणकिया जा सकता है। रासायनिक नियंत्रण हेतु कार्बोफ्यूरान 3 जी 30 किग्रा0 अथवा क्लोरपाइरीफास 20 प्रतिशत ई0सी0 1.5 ली0 अथवा मोनोक्रोटोफास 36 प्रतिशत एस0एल0 1.5-2.25 ली0 प्रति0 हे0 की दर से 600-800 ली0 पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए।
● लाल सड़न रोग- इस रोग से बचाव हेतु प्रतिरोधी किस्मो का प्रयोग करना चाहिए। बुवाई हेतु स्वस्थ गन्ने के टुकडो का चयन करना चाहिए। रोगग्रस्त फसल की पैट्रनिंग नही करना चाहिए। प्रभावित क्षेत्रो/फसल चक्र अपनाना चाहिए। इस रोग के वाहक कीट माहू के नियंत्रण के लिए येलो स्टिकी ट्रैप का प्रयोग करना चाहिए। स्यूडोमोनास फ्लोरिसेंस 2.5 किग्रा0 प्रति है0 की दर से 100 किग्रा0 अधसडे गोबर की खाद में मिलाकर प्रयोग करना चाहिए। गन्ने के टुकडो को कार्बेण्डाजिम 50 प्रतिशत के 2 प्रतिशत घोल (2 ग्राम रसायन प्रति लीटर पानी) में 5-10 मिनट डुबोने के प्श्चात बुवाई करना चाहिए।
कद्दू वर्गीय सब्जियांः-
● फल मक्खी ग्रसित फलों को इकठठा करके नष्ट कर देना चाहिए। जैविक नियंत्रण हेतु – 0.15 प्रतिशत 2.5 लीटर मात्रा 500-600 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टैयर की दर में 10-15 दिन के अंतराल पर छिड़काव करना चाहिए। 6-8 फेरोमोन ट्रैप प्रति हे0 की दर से प्रयोग करना चाहिए। मिथाइल यूजीनाल+इथाइल एल्कोहल+मैलाथियान 50 प्रतिशत ई0 सी0 के 4.6.1 के बने घोल में 5×5×1.5 मिमी0 के प्लाईवृड के टुकड़ों को एक सप्ताह तक शोधित कर लगायें, जिससे एक किमी0 तक की फल मक्खी आकर्षित होती है, जिसे एकत्र कर नष्ट कर दें।
सहभागी फसल निगरानी एवं निदान प्रणाली (पी0 सी0 एस0 आर0 एस0)
● कृषि विभाग (कृषि रक्षा अनुभाग ) द्वारा फसलो में लगने वाले कीट/रोग सम्बन्धी समस्याओ के त्वरित निदान के लिए दो मोबाइल नंबर क्रमशः 9452247111 एवं 9452257111 उपलब्ध कराये गये है। कृषक अपनी फसल सम्बन्धी समस्याओं को व्हाट्सप्प/एस0एम0एस0 के माध्यम से भेज सकते है। इसके अंतर्गत प्राप्त समस्याओं का समाधान निर्धारित समय सीमा 48 घंटे में किया जाता है।
खरीफ फसलो में सामायिक कीट/रोग के प्रकोप की सम्भावना के दृष्टिगत बचाव एवं प्रबन्धन हेतु जिला कृषि रक्षा अधिकारी की एडवाइजरी
RELATED ARTICLES



