गौतमबुद्धनगर: जिला कृषि रक्षा अधिकारी विनोद कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि खरीफ की प्रमुख फसलें जैसे धान, मक्का, गन्ना, ज्वार, बाजरा आदि में बेहतर उपज प्राप्त करने और फसल को बीज जनित रोगों से बचाने के लिए बीज शोधन आवश्यक है। बीज जनित रोग कभी-कभी फसल को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिससे उत्पादन प्रभावित होता है। अतः किसानों को सलाह दी जाती है कि वे बुवाई से पूर्व बीज शोधन अवश्य करें।
जिला कृषि रक्षाअधिकारी ने बताया कि बीज शोधन के लिए किसान थीरम 75 प्रतिशत डब्लू.पी. की 2.5 ग्राम मात्रा या कार्बेन्डाजिम 50 प्रतिशत की 2 ग्राम मात्रा प्रति किलोग्राम बीज या ट्राइकोडरमा की 4 ग्राम मात्रा प्रति किलोग्राम बीज में से किसी एक का प्रयोग करें। इसके अतिरिक्त, धान व अन्य फसलों में जीवाणु जनित रोगों की रोकथाम के लिए स्ट्रेप्टोमाइसिन सल्फेट 90 प्रतिशत एवं टेट्रासाइक्लिन 10 प्रतिशत की मिश्रित 4 ग्राम मात्रा से प्रति किलोग्राम बीज का उपचार किया जा सकता है।
बीज शोधन से न केवल फसल को रोगों से बचाया जा सकता है, बल्कि इसके कई अन्य लाभ भी हैं। इससे जमाव अच्छा होता है, मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ती है और वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण होता है। यह पौधों को जैविक नाइट्रोजन उपलब्ध कराता है और मिट्टी की उर्वरता तथा उत्पादकता बढ़ाने में सहायक होता है। इसके अलावा, मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्म जीवों को संरक्षित रखने तथा फसल की सुरक्षा के लिए यह प्रक्रिया अत्यंत उपयोगी है।
बीज शोधन करते समय कुछ सावधानियों का पालन करना जरूरी है। रासायनिक विधियों में केवल निर्धारित मात्रा में ही रसायनों का प्रयोग करें। रासायनिक व जैविक विधियों में से किसी एक को ही अपनाएं। यदि जैविक विधि जैसे बायोपेस्टीसाइड का प्रयोग करें तो उसकी निर्माण व समाप्ति तिथि देखकर ही उपयोग करें और धूप या गर्मी से बीजों को बचाएं। दीमक या चींटी से नुकसान की आशंका होने पर क्लोरपाइरीफॉस की 03 मिली मात्रा प्रति किलोग्राम बीज से उपचार करें। यदि एक से अधिक बीज शोधन विधियों का प्रयोग करना हो तो एफआईआर क्रम का पालन करें। पहले फफूंदनाशी, फिर कीटनाशी और अंत में जैविक उपचार करें।
खरीफ की फसलों में बीज शोधन अनिवार्य: कृषि रक्षा अधिकारी
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