
लखनऊ-गोरखपुर में बारिश के बीच भी पूजा, आतिशबाजी और गीतों से गूंजे घाट; पूरे यूपी में छठ महापर्व का भव्य उत्सव संपन्न
वाराणसी/लखनऊ/गोरखपुर। उत्तर प्रदेश में चार दिनों तक चलने वाले छठ महापर्व का भव्य समापन मंगलवार सुबह हुआ। 36 घंटे के निर्जला उपवास और कठोर तपस्या के बाद महिलाएं और पुरुष श्रद्धालु सूप लेकर नदी और तालाबों में उतरे और उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया। गंगा, सरयू और गोमती के घाटों पर भक्ति और आस्था का अद्भुत दृश्य नजर आया।
काशी के घाटों पर श्रद्धा का महासागर
वाराणसी में मंगलवार को गंगा के 88 घाटों पर लगभग तीन लाख श्रद्धालु जुटे।
कई भक्त भगवान शिव और पार्वती का रूप धारण करके घाटों पर पहुंचे और सूर्यदेव को अर्घ्य दिया।
किन्नर समुदाय के लोग भी नाचते-गाते घाट पर पहुंचे, गीतों की मधुर थाप से माहौल उल्लासपूर्ण और भक्तिमय बन गया।
विदेशी पर्यटक भी घाटों पर आस्था का यह अनूठा दृश्य देखने आए और कैमरों में कैद किया।
लखनऊ और गोरखपुर में बारिश भी नहीं रोक सकी श्रद्धालुओं की भक्ति
राजधानी लखनऊ और गोरखपुर में मंगलवार सुबह तेज बारिश हुई।
लेकिन इससे श्रद्धालुओं की आस्था पर कोई असर नहीं पड़ा।
महिलाएं भीगते हुए घाटों पर खड़ी रहीं और सूर्योदय की पहली किरण का बेसब्री से इंतजार किया।
सूर्य की किरण के साथ छठ गीतों और आतिशबाजी की चमक ने पूरे घाटों को जगमगा दिया।
कई जगह भीड़ के कारण हल्की धक्का-मुक्की हुई, लेकिन स्थानीय श्रद्धालुओं और पुलिस ने तुरंत माहौल शांत करा दिया।
प्रदेश के अन्य जिलों में छठ महापर्व की धूम
- प्रयागराज: महिलाओं ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर नृत्य किया और सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित किया।
- अयोध्या: श्रद्धालु परिवार सहित सरयू तट पर घाट पहुंचे।
- जौनपुर: सपा विधायक रागिनी सोनकर ने भी व्रतियों के साथ पूजा की।
- लखनऊ-गोरखपुर: लोकगीतों और ढोलक की मधुर थाप से घाट गूंजते रहे।
सुरक्षा और व्यवस्थाओं का पूरा इंतजाम
प्रदेश सरकार ने छठ पर्व के दौरान सुरक्षा और सुविधा के कड़े इंतजाम किए।
- पुलिस, पीएसी, आरएएफ और एसडीआरएफ की टीमें तैनात।
- महिला पुलिसकर्मियों की अलग ड्यूटी, महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा के लिए।
- घाटों पर गोताखोर और जल पुलिस सतर्क।
- बिजली, प्रकाश, सफाई और रोशनी की विशेष व्यवस्था।
छठ महापर्व: आस्था, अनुशासन और लोकसंस्कृति का संगम
छठ महापर्व केवल पूजा-अर्चना का पर्व नहीं है, यह लोकजीवन, स्वच्छता और सामाजिक एकता का प्रतीक भी है।
गंगा, सरयू और गोमती के घाट दीपों और फूलों से जगमगाते रहे।
लोकगीतों, ढोल-नगाड़ों और व्रतियों की भक्ति ने पूरे प्रदेश में आस्था और उल्लास का अनोखा संगम प्रस्तुत किया।



